:: बाबा जयगुरुदेव की 14वीं पुण्यतिथि पर भंडारा आयोजित; हजारों श्रद्धालुओं ने ली नशा मुक्ति और जीव-दया की शपथ :: इंदौर (ईएमएस)। शहर के जयगुरुदेव आश्रम में शुक्रवार को आस्था, अध्यात्म और संकल्प का त्रिवेणी संगम देखने को मिला। बाबा जयगुरुदेव की 14वीं पुण्यतिथि (भंडारा) के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में इंदौर-उज्जैन संभाग सहित प्रदेशभर से आए हजारों अनुयायियों ने शिरकत की। जब हजारों हाथ एक साथ शाकाहार और नशा मुक्त समाज के लिए उठे, तो वह दृश्य सामाजिक परिवर्तन की एक नई इबारत लिखता प्रतीत हुआ। इंदौर-उज्जैन संभाग सहित प्रदेश के अनेक जिलों से आए हजारों अनुयायियों ने बाबा के वचनों को अक्षरशः जीवन में उतारने का संकल्प लिया। आयोजन की शुरुआत सुबह 8 बजे पूजन और सत्संग के साथ हुई। सत्संग की अमृत वर्षा ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वक्ताओं ने मानव जीवन की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया कि यह शरीर केवल भौतिक सुखों के लिए नहीं, बल्कि जीते जी परमात्मा को प्राप्त करने का एक दुर्लभ साधन है। सुमिरन, ध्यान और भजन के जरिए जीवात्मा के कल्याण का मार्ग बताते हुए संदेश दिया गया कि किसी पूर्ण महात्मा की शरण में जाकर ही इस अनमोल जीवन को सफल बनाया जा सकता है। :: जीव-दया के बिना अधूरी है भक्ति :: सत्संग का मुख्य केंद्र जीव-दया और शाकाहार रहा। आध्यात्मिक चर्चा के दौरान जोर देकर कहा गया कि धर्म का असली आधार ही दया है। यदि हृदय में बेजुबान जीवों के प्रति करुणा नहीं है, तो भक्ति अधूरी है। इसी विचार से प्रेरित होकर हजारों भक्तों ने मांसाहार के त्याग और शाकाहारी जीवन शैली को जन-जन तक पहुँचाने की शपथ ली। साथ ही नशा मुक्त इंदौर से स्वस्थ और समृद्ध इंदौर बनाने का आह्वान किया गया। उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में व्यसन मुक्त भारत की ओर कदम बढ़ाने की बात कही। इतने विशाल समागम के बावजूद आश्रम परिसर में अद्भुत अनुशासन और सामाजिक समरसता देखने को मिला। आयोजन की कमान अध्यक्ष चतर सिंह राजावत, मोहन सलवारिया और छोटेलाल जायसवाल ने संभाली। इन प्रमुखों के कुशल नेतृत्व में हजारों की भीड़ के बाद भी कार्यक्रम सुव्यवस्थित रहा। दोपहर 2 बजे से विशाल भंडारे का शुभारंभ हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर प्रसादी ग्रहण की। सेवादारों के समर्पण और व्यवस्थित प्रबंधन ने इस आयोजन को अनुकरणीय बना दिया। सामाजिक समरसता के इस आयोजन में लोगों का जुटना और शालीनता से प्रसादी पाना बाबा के संदेशों के प्रति उनके अटूट विश्वास को दर्शाता है। प्रकाश/15 मई 2026