लेख
17-May-2026
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हिमाचल में पालमपुर जिला अपने हरे-भरे चाय बागानों के लिए प्रसिद्ध है, चाय के बागान यहां विशाल क्षेत्रों में फैले हुए हैं। पालमपुर को उत्तर भारत में चाय की राजधानी भी कहा जाता है। चाय के बागान शांत वातावरण उत्पन्न करते हैं और इन बागानों की फ़ोटो लेना बेहद सुखद अनुभव होता है।ठंडी जलवायु और चीड़-प्याले व देवदार के घने जंगलों से घिरा पालमपुर, हिमाचल प्रदेश की विशाल धौलाधार पर्वतमाला के बीच बसा एक रमणीय पर्वतीय स्थल है। हरे-भरे चाय बागानों से लेकर आलीशान पहाड़ों तक की प्राकृतिक सुंदरता पालमपुर को और भी आकर्षक बनाती है। जब चाय बागान में कदम रखते है तो लगता है जैसे स्वर्ग में पहुंच गए हो।चाय के पौधों की मीठी सुगंध, विस्मयकारी दृश्य मनुष्य की इंद्रियों को ताजगी प्रदान करती है। ठंडी हवा के झोंके के साथ गरमागरम चाय की चुस्की लेते हुए एक अनूठा अहसास होता है। जिसका आनंद पर्यटक बार-बार लेना चाहते है।वही ताशी जोंग मठ को पालमपुर का गौरव कहा जाता है। मठ से निकलता घना जुनिपर धुआं जब बादलों को छूता है, तो मन में एक पवित्रता का अनुभव होने लगता है। बौद्ध भिक्षुओ के लहराते ध्वज और उनके द्वारा की जा रही प्रार्थनाओं से परम शांति की अनुभूति होती है। यह जोंगमठ पूजा-अर्चना का केंद्र तो है ही,साथ ही यह दशकों से तिब्बती शरणार्थियों का स्वर्गिक स्थान भी है। पालमपुर में सौरभ वन विहार एक शांत प्रकृति उद्यान है, जिसे कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीर सौरभ कालिया की स्मृति में बनाया गया है। यह पार्क एकांत और आत्मचिंतन के लिए आदर्श स्थान है। शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर सुकून पाने का बेहतरीन स्थल है। चारों ओर बादलों से ढके पालमपुर के पहाड शहीद सौरभ कालिया की याद दिलाते हैं, जो एक वीर सिपाही थे और हमारी रक्षा के लिए सीमाओं पर डटे रहे और देश पर न्योछावर हो गए। यह पार्क आज भारतीय सेना के सभी निडर सैनिकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक बन गया है। यह पार्क नौका विहार व पक्षी अवलोकन के लिए एक बेहतरीन स्थान है।मिट्टी शिल्प कला की प्रतीक एंड्रेटा पॉटरी की शुरुआत पालमपुर में सन 1983 में मनसिमरन सिंह ने की थी। यहां मिट्टी के बर्तन बनाने का प्रशिक्षण बिल्कुल मुफ्त दिया जाता हैं ।यह एक ऐसी रुचिकर ट्रेनिंग है, जिसमें ज़्यादातर पर्यटक उत्साह के साथ भाग लेते हैं। (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 17 मई /2026