-मशहूर वीणा वादक सलिल भट्ट बोले- पिता के साथ मंच साझा करना सबसे बड़ी परीक्षा नई दिल्ली,(ईएमएस)। प्रसिद्ध वीणा वादक सलिल भट्ट ने हाल ही में मिले नेशनल एक्सिलेंस अवॉर्ड के बाद अपने संगीत सफर, पारिवारिक विरासत और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से जुड़ी खूबसूरत यादों को साझा किया है। उन्होंने बताया कि जर्मनी में एक प्रस्तुति के दौरान डॉ. कलाम ने उनकी पीठ थपथपाकर उनकी कला की सराहना की थी, जिसे वह अपने जीवन का अविस्मरणीय क्षण मानते हैं। एक इंटरव्यू के दौरान सलिल भट्ट ने कहा, स्वतंत्र प्रस्तुतियों में उन्हें पूरी आजादी महसूस होती है, लेकिन जब वे अपने पिता और गुरु पंडित विश्वमोहन भट्ट के साथ मंच साझा करते हैं तो वह उनके लिए सबसे कठिन परीक्षा बन जाती है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अगर मैं बढ़-चढ़कर बजाऊं तो डांट का डर रहता है और अगर कम बजाऊं तो यह सुनना पड़ सकता है कि इतना सिखाया किसलिए गया। उनके साथ प्रस्तुति देना युद्ध जीतने जैसा होता है।” सलिल भट्ट ने कहा, उनके पिता ने पश्चिमी वाद्य गिटार को भारतीय शास्त्रीय संगीत के अनुरूप ढालते हुए 20 तारों वाली ‘मोहन वीणा’ विकसित की थी, जिसमें सरोद, वीणा और सितार की ध्वनियों का अनूठा संगम है। आगे चलकर उन्होंने ‘विश्व वीणा’ और ‘हंस वीणा’ जैसे वाद्य भी बनाए। सलिल भट्ट ने वर्ष 1998 में अपनी नई प्रस्तुति ‘सात्विक वीणा’ तैयार की, जिसे उन्होंने अपने बेटे के नाम पर रखा। इसकी विशेषता यह है कि यह एक ही लकड़ी से बनी होती है और इसमें कोई जोड़ नहीं होता, जिससे इसके टूटने की संभावना कम रहती है। अपने सबसे यादगार अनुभव को याद करते हुए उन्होंने बताया कि जर्मनी की संसद में प्रस्तुति के बाद डॉ. कलाम स्वयं मंच पर आए और बड़ी उत्सुकता से सात्विक वीणा को देखा। सलिल भट्ट के अनुसार, “उन्होंने मेरी पीठ थपथपाई और कहा कि मैं भी थोड़ा-बहुत वीणा बजाता हूं। वह पल आज भी मेरे दिल के बेहद करीब है।” हिदायत/ईएमएस 17 मई 2026