वॉशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि दोनों देशों के बीच जल्द ही कोई शांति समझौता नहीं हुआ, तो तेहरान के लिए बहुत बुरा समय आने वाला है। एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान को इस समझौते में गंभीरता से दिलचस्पी दिखानी चाहिए। डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देशों के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता से पर्दे के पीछे बातचीत का दौर चल रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस संबंध में बताया कि उन्हें ट्रंप प्रशासन की ओर से बातचीत जारी रखने की इच्छा के संदेश तो मिले हैं, लेकिन अमेरिका पर गहरे अविश्वास के कारण यह पूरी प्रक्रिया काफी धीमी गति से आगे बढ़ रही है। ईरान ने पूर्व की परमाणु वार्ताओं का हवाला देते हुए अमेरिका पर दो बार धोखा देने और विरोधाभासी संकेत भेजने का आरोप लगाया है, जिसे वे बातचीत में बड़ी बाधा मान रहे हैं। इस कूटनीतिक रस्साकशी के बीच ईरान ने क्षेत्रीय शांति की बहाली के लिए भारत से बड़ी भूमिका निभाने की मांग की है और चीन जैसे देशों के कूटनीतिक समर्थन का स्वागत किया है। वहीं, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर घालिबाफ ने चेतावनी दी है कि अमेरिका को ईरान के 14 सूत्री प्रस्ताव को स्वीकार करना ही होगा, अन्यथा उसे असफलता का सामना करना पड़ेगा। इससे पहले राष्ट्रपति ट्रंप इस ईरानी प्रस्ताव को खारिज कर चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी पक्षों से युद्धविराम का पूरी तरह पालन करने की अपील की है। 17 अप्रैल से शुरू हुए इस युद्धविराम को हाल ही में 45 दिनों के लिए बढ़ाया गया था, लेकिन इसके बाद भी इसका लगातार उल्लंघन हो रहा है। लेबनान के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे संघर्ष में अब तक 2,900 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें से 400 से अधिक लोगों की मौत युद्धविराम लागू होने के बाद हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-अमेरिका वार्ता की सफलता न केवल इस क्षेत्र की स्थिरता के लिए, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। वीरेंद्र/ईएमएस/17मई 2026