देश इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। राजस्थान से लेकर गुजरात महाराष्ट्र ओडिशा उत्तरप्रदेश बिहार झारखंड मध्यप्रदेश और आंध्रप्रदेश तक गर्म हवाओं ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है। लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। मौसम विभाग लगातार चेतावनी जारी कर रहा है कि दिन के समय धूप और लू से बचें क्योंकि तापमान कई इलाकों में 42 से 49 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। राजस्थान के बाड़मेर में 48.3 डिग्री तापमान रिकॉर्ड होने के बाद पूरा पश्चिमी भारत मानो आग की भट्टी में बदल गया है। राजस्थान इस समय देश का सबसे गर्म राज्य बना हुआ है। बाड़मेर लगातार तीसरे दिन देश का सबसे गर्म शहर रहा। जैसलमेर फलोदी जोधपुर और बीकानेर में भी तापमान 45 डिग्री के ऊपर पहुंच चुका है। मौसम विभाग ने बाड़मेर जैसलमेर और जोधपुर में रेड अलर्ट जारी कर लोगों को दोपहर में घरों से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी है। हालात इतने खराब हैं कि जालोर में गर्मी के कारण ट्रांसफार्मर में आग लग गई। बिजली उपकरणों के ओवरहीट होने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। दूसरी ओर जैसलमेर में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की ड्यूटी का समय बदलना पड़ा ताकि जवानों को तेज धूप और लू से राहत मिल सके। अब पुलिसकर्मी सुबह और शाम की शिफ्ट में काम कर रहे हैं। गुजरात में भी स्थिति कम गंभीर नहीं है। उत्तर और दक्षिण गुजरात में हीटवेव के कारण लोगों की दिनचर्या बदल गई है। अहमदाबाद सूरत राजकोट और वडोदरा जैसे शहरों में दोपहर के समय बाजार सूने दिखाई देते हैं। लोग सुबह जल्दी और शाम को ही बाहर निकलना पसंद कर रहे हैं। गर्म हवाओं के थपेड़ों ने बच्चों बुजुर्गों और मजदूरों की परेशानी बढ़ा दी है। सड़कों पर ठंडे पेय पदार्थों की दुकानों पर भीड़ बढ़ गई है। लोग लस्सी छाछ नींबू पानी और बर्फ के गोलों से राहत पाने की कोशिश कर रहे हैं। महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में भी सूरज आग बरसा रहा है। नागपुर अकोला और विदर्भ के कई हिस्सों में तापमान लगातार बढ़ रहा है। खेतों में काम करने वाले किसान और निर्माण कार्यों में लगे मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। ओडिशा और आंध्रप्रदेश में समुद्री नमी के कारण उमस भी बढ़ गई है जिससे लोगों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ रही है। बिहार झारखंड और उत्तरप्रदेश में भी लू ने लोगों को बेहाल कर दिया है। कई शहरों में अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। भीषण गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं बल्कि पशु पक्षियों पर भी दिखाई दे रहा है। पेड़ों के नीचे जानवर छांव तलाशते नजर आते हैं जबकि पक्षी पानी की तलाश में इधर उधर भटक रहे हैं। कई जगह सामाजिक संगठनों और छात्रों ने परिंडे लगाकर पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था शुरू की है। यह पहल गर्मी के इस कठिन समय में संवेदनशीलता का उदाहरण बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हर साल गर्मी का स्वरूप और अधिक खतरनाक होता जा रहा है। जंगलों की कटाई बढ़ते प्रदूषण और अनियोजित शहरीकरण ने तापमान को और बढ़ाया है। शहरों में कंक्रीट और डामर की सड़कों के कारण गर्मी अधिक महसूस होती है। जल स्रोतों के सूखने और भूजल स्तर गिरने से समस्या और गंभीर बन रही है। यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में हालात और भयावह हो सकते हैं। लू और भीषण गर्मी से बचने के लिए सावधानी बेहद जरूरी है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो सिर को कपड़े या टोपी से ढंकना चाहिए। शरीर में पानी की कमी न हो इसके लिए बार बार पानी पीना जरूरी है। छाछ लस्सी नींबू पानी नारियल पानी और ओआरएस जैसे पेय पदार्थ शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं। हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने चाहिए ताकि शरीर को कम गर्मी लगे। खाली पेट बाहर नहीं निकलना चाहिए और अधिक तला भुना भोजन खाने से बचना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है क्योंकि उन पर लू का असर जल्दी होता है। घरों में खिड़कियों और दरवाजों को पर्दों से ढंककर रखना चाहिए ताकि गर्म हवा अंदर न आए। पशुओं और पक्षियों के लिए भी पानी की व्यवस्था करनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को चक्कर आना तेज बुखार उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए क्योंकि यह हीट स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। देश के सामने यह गर्मी केवल मौसमी संकट नहीं बल्कि पर्यावरणीय चेतावनी भी है। तेजी से बदलता मौसम यह संकेत दे रहा है कि प्रकृति के साथ लगातार हो रहे खिलवाड़ का असर अब सीधे लोगों के जीवन पर पड़ रहा है। सरकारों को जल संरक्षण हरित क्षेत्र बढ़ाने और प्रदूषण कम करने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे। साथ ही लोगों को भी पेड़ लगाने पानी बचाने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने की आवश्यकता है। यदि अभी से गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले समय में गर्मी का यह संकट और विकराल रूप ले सकता है। (L 103 जलवन्त टाऊनशिप पूणा बॉम्बे मार्केट रोड, नियर नन्दालय हवेली सूरत मो 99749 40324 वरिष्ठ पत्रकार साहित्यकार स्तम्भकार) ईएमएस/ 18 मई 26