अंबरनाथ, (ईएमएस)। अंबरनाथ नगरपरिषद में शिवसेना (शिंदे) और भाजपा के बीच पिछले छह महीनों से चल रहा कानूनी और राजनीतिक विवाद अब समाप्त हो गया है। दोनों दलों ने एक-दूसरे के खिलाफ जिला अधिकारी कार्यालय और अदालत में दाखिल शिकायतें और दावे वापस लेने के लिए सोमवार को आधिकारिक आवेदन जमा किए। स्थानीय नेताओं के बीच बनी सहमति के बाद शहर के रुके हुए विकास कार्यों का रास्ता भी साफ हो गया है। दरअसल नगरपरिषद चुनाव के बाद सत्ता गठन को लेकर शिवसेना और भाजपा के बीच तीखी राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई थी। शिवसेना ने भाजपा-कांग्रेस गठबंधन और मनोनीत नगरसेवकों की नियुक्ति को जिला अधिकारी और अदालत में चुनौती दी थी। वहीं भाजपा ने शिवसेना-राष्ट्रवादी की महाविकास आघाड़ी पर आपत्ति जताते हुए उपनगराध्यक्ष पद का चुनाव अवैध होने का दावा किया था। हालांकि, पिछले सप्ताह दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं की मध्यस्थता के बाद अंबरनाथ में आधिकारिक गठबंधन की घोषणा की गई। इसके बाद शनिवार को एक होटल में दोनों पक्षों के प्रमुख नेताओं की संयुक्त बैठक आयोजित हुई। बैठक में विधायक डॉ. बालाजी किणीकर, पूर्व नगराध्यक्ष सुनील चौधरी, अब्दुल शेख, गटनेता रविंद्र करंजुले के साथ भाजपा के जिलाध्यक्ष नंदू परब, प्रदेश सचिव गुलाब करंजुले और गटनेता अभिजीत करंजुले पाटिल मौजूद रहे। बैठक में पुराने विवाद भुलाकर अदालत और प्रशासन में चल रहे मामलों को वापस लेने पर सहमति बनी। भाजपा के गटनेता अभिजीत करंजुले ने कहा कि गठबंधन के बाद आपसी सहमति से शिकायतें वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इसके लिए आवेदन दाखिल किए जा चुके हैं। वहीं शिवसेना के गटनेता रविंद्र करंजुले ने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर मतभेद खत्म करने के लिए यह निर्णय लिया गया है। फिलहाल दोनों दलों ने मौखिक रूप से अपने दावे वापस लेने की घोषणा की है और जल्द ही लिखित मंजूरी की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाएगी। इस फैसले के बाद दोनों पक्षों पर चल रही कानूनी कार्रवाई का खतरा टल गया है और अब अंबरनाथ के नागरिकों की उम्मीदें शहर के विकास कार्यों पर टिकी हैं। संतोष झा- १८ मई/२०२६/ईएमएस