बालाघाट (ईएमएस). ग्रीष्मकालीन कराते खेल प्रशिक्षण शिविर में आत्मरक्षात्मक खेलों के प्रति बच्चों, विशेषकर बालिकाओं का रुझान लगातार बढ़ रहा है। शिविर में 5 वर्ष से 18 वर्ष आयु तक के बच्चों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है, जिसमें लगभग 50 से अधिक बालिकाएं शामिल हैं। बालिकाओं की संख्या बालकों से अधिक होना इस बात का संकेत है कि अभिभावक और युवतियां आत्मरक्षा खेलों के महत्व को गंभीरता से समझ रहे हैं। अभिभावकों और प्रतिभागी बालिकाओं का कहना है कि कराते जैसे आत्मरक्षात्मक खेल केवल मैदान में शारीरिक और मानसिक मजबूती ही नहीं देते, बल्कि जीवनभर युवतियों के लिए सुरक्षा कवच और आत्मविश्वास का माध्यम बनते हैं। मुलना स्टेडियम स्थित खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कराते सेंटर में जिला खेल अधिकारी राहुल बारेसा के मार्गदर्शन में जिला कराते प्रशिक्षक सजिन्द्र कृष्णन द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण प्रतिदिन सुबह 6.30 बजे एवं शाम 5 बजे आयोजित किया जा रहा है। शिविर में आत्मरक्षा प्रशिक्षण के साथ-साथ खिलाडिय़ों की फिटनेस और मनोरंजन को ध्यान में रखते हुए शाम के अभ्यास के बाद जुंबा डांस के माध्यम से व्यायाम भी कराया जा रहा है। कराते शिविर में अन्य रचनात्मक एवं खेल गतिविधियों को शामिल किए जाने से अभिभावकों और खिलाडिय़ों में आरोह 2026 समर कैंप के प्रति उत्साह लगातार बढ़ रहा है। भानेश साकुरे / 18 मई 2026