लेख
20-May-2026
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डीएनडी–फरीदाबाद–सोहना एक्सप्रेसवे और जेवर एयरपोर्ट कनेक्टिविटी से बदलती विकास की तस्वीर जब सड़कें केवल दूरी कम करने का माध्यम न रहकर विकास, व्यापार,निवेश और भविष्य की दिशा तय करने लगें,तब वे किसी भी राष्ट्र की आर्थिक धमनियों का रूप ले लेती हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर में तेजी से विकसित हो रही डीएनडी- फरीदाबाद-सोहना एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे परियोजना भी इसी बदलते भारत की एक बड़ी तस्वीर प्रस्तुत करती है।यह केवल एक सड़क परियोजना नहीं,बल्कि दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच नई आर्थिक गति, आधुनिक कनेक्टिविटी और भविष्य की शहरी संरचना का आधार बनने जा रही है।केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नीतिन गटकरी द्वारा इस परियोजना का निरीक्षण केवल औपचारिकता नहीं था, बल्कि यह इस बात का संकेत भी था कि केंद्र सरकार एनसीआर की यातायात समस्याओं को दीर्घकालिक दृष्टि से हल करने की दिशा में गंभीरता से कार्य कर रही है।निरीक्षण के दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित केंद्र और राज्य सरकारों के कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति इस परियोजना के महत्व को और स्पष्ट करती है।लगभग 59 किलोमीटर लंबी और 4,463 करोड़ रुपये की लागत वाली यह एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे परियोजना दिल्ली,नोएडा, गाजियाबाद,फरीदाबाद,गुरुग्राम और सोहना को एक तेज़ एवं आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ेगी। आने वाले समय में यह कॉरिडोर एनसीआर की जीवन रेखा साबित हो सकता है। आज दिल्ली और उससे सटे क्षेत्रों में बढ़ते ट्रैफिक जाम,प्रदूषण और यात्रा में लगने वाले अत्यधिक समय ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है। ऐसे में यह परियोजना न केवल यात्रा समय कम करेगी, बल्कि ईंधन की बचत और प्रदूषण नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषताओं में शामिल है 140 मीटर लंबा नेटवर्क आर्च ब्रिज। आधुनिक स्टील संरचना पर आधारित यह पुल भारतीय इंजीनियरिंग क्षमता का नया उदाहरण माना जा रहा है। टाइड-आर्च तकनीक और क्रॉस हैंगर सिस्टम के उपयोग से यह पुल अधिक मजबूत,सुरक्षित और भूकंप जैसी परिस्थितियों में भी स्थिर रहेगा।भारत में तेजी से विकसित हो रही आधुनिक अवसंरचना परियोजनाओं के बीच यह पुल तकनीकी दृष्टि से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा सकता है।परियोजना में अत्याधुनिक निर्माण तकनीकों का उपयोग यह दर्शाता है कि भारत अब पारंपरिक निर्माण पद्धतियों से आगे बढ़कर विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल की ओर बढ़ रहा है।प्रीकास्ट सेगमेंटल टेक्नोलॉजी,लॉन्चिंग गर्डर,उच्च गुणवत्ता वाले स्टील,हाई डैम्पिंग रबर बेयरिंग और आधुनिक विस्तार जोड़ों का प्रयोग इसे तकनीकी रूप से मजबूत बनाता है।यही कारण है कि भारत की सड़क परियोजनाएं अब केवल लंबाई और चौड़ाई तक सीमित नहीं रहीं,बल्कि गुणवत्ता और दीर्घकालिक उपयोगिता के नए मानक स्थापित कर रही हैं। इस परियोजना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पक्ष पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है।ओखला और गाजीपुर लैंडफिल से बायो-माइनिंग द्वारा निकाली गई लगभग दो लाख मीट्रिक टन निष्क्रिय सामग्री का उपयोग सड़क निर्माण में किया गया है।यह कदम केवल निर्माण लागत घटाने का प्रयास नहीं,बल्कि शहरी कचरा प्रबंधन और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में भी एक सकारात्मक पहल है। दिल्ली जैसे महानगरों में बढ़ते कूड़ा पहाड़ लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं। ऐसे में उनका उपयोग निर्माण कार्यों में किया जाना ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल की एक सार्थक मिसाल बन सकता है।परियोजना के किनारे ध्वनि अवरोधक,हरित पट्टी और व्यापक पौधारोपण का प्रावधान यह दर्शाता है कि अब विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में भी गंभीर प्रयास हो रहे हैं। आधुनिक भारत की अधोसंरचना तभी सफल मानी जाएगी जब वह आर्थिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को भी समान महत्व दे।इस पूरे कॉरिडोर का सबसे रणनीतिक पहलू प्रस्तावित नोएडा इन्टरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़ी कनेक्टिविटी है।जेवर में बन रहा यह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भविष्य में देश के सबसे बड़े एविएशन हब के रूप में विकसित होने की क्षमता रखता है।वर्तमान में दिल्ली स्थित इन्दिरा गाँधी इन्टरनेशनल एयरपोर्ट पर लगातार बढ़ता यात्री दबाव नई चुनौतियां पैदा कर रहा है।ऐसे में जेवर एयरपोर्ट का विकास और उससे जुड़ी तेज़ सड़क संपर्क परियोजनाएं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही हैं।फरीदाबाद के चंदावली गांव से गौतम बुद्ध नगर के दयानापुर तक बनने वाला लगभग 31 किलोमीटर लंबा नया एक्सप्रेसवे इस दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लगभग 2,360 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना यमुना एक्सप्रेसवे, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे तथा दिल्ली - मुंबई एक्सप्रेसवे को जोड़ते हुए उत्तर भारत के बड़े हिस्से को सीधे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जोड़ेगी। इससे सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि उत्तर भारत से आने वाला भारी यातायात दिल्ली में प्रवेश किए बिना सीधे एयरपोर्ट तक पहुंच सकेगा।दक्षिण दिल्ली,गुरुग्राम और फरीदाबाद से एयरपोर्ट तक यात्रा भी काफी तेज और आसान हो जाएगी।इससे न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी,बल्कि औद्योगिक गतिविधियों, लॉजिस्टिक्स और व्यापार को भी नई गति प्राप्त होगी।चार बड़े इंटरचेंज,रेल ओवर ब्रिज और प्रस्तावित एलिवेटेड कॉरिडोर इस परियोजना को और अधिक प्रभावी बनाते हैं।विशेष रूप से डीएफसीसीआईएल क्रॉसिंग पर प्रस्तावित आठ लेन का आरओबी भविष्य की यातायात जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार केवल वर्तमान आवश्यकताओं को नहीं,बल्कि आने वाले दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर अधोसंरचना विकसित कर रही है। दरअसल,एनसीआर अब केवल एक प्रशासनिक क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत की आर्थिक गतिविधियों का सबसे बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। बढ़ती आबादी,औद्योगिक विस्तार, शहरीकरण और निवेश की नई संभावनाओं के बीच मजबूत सड़क नेटवर्क की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।यही कारण है कि डीएनडी-फरीदाबाद-सोहना हाईवे जैसी परियोजनाएं केवल परिवहन परियोजनाएं नहीं, बल्कि भविष्य के आर्थिक गलियारों के रूप में देखी जा रही हैं।फरीदाबाद मास्टर प्लान 2031 के अंतर्गत जिन क्षेत्रों को उच्च घनत्व वाले शहरी विकास क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है, यह कॉरिडोर उन्हीं क्षेत्रों से होकर गुजरता है। इससे आने वाले वर्षों में रियल एस्टेट, औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना भी बढ़ेगी।भारत आज जिस गति से आधुनिक अधोसंरचना निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है,वह वैश्विक स्तर पर उसकी बदलती आर्थिक शक्ति का संकेत है।एक्सप्रेसवे, हाई-स्पीड कॉरिडोर,आधुनिक पुल और मल्टी- मोडल कनेक्टिविटी अब विकास के नए प्रतीक बन चुके हैं। डीएनडी-फरीदाबाद-सोहना एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे परियोजना भी इसी विकसित भारत की बदलती तस्वीर का एक महत्वपूर्ण अध्याय है,जो आने वाले वर्षों में एनसीआर की रफ्तार और आर्थिक क्षमता दोनों को नई उड़ान देने का कार्य करेगी। (लेखक स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं) ईएमएस/20/05/2026