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21-May-2026
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-केंद्र की अर्थव्यवस्था नीति पर कांग्रेस का तीखा हमला -आर्थिक नीति-निर्माण में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता नई दिल्ली (ईएमएस)। कांग्रेस ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार हमलावार है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री मोदी भले ही ज्ञान के बल पर चुनाव जीत रहे हों, लेकिन देश की गंभीर आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए उन्हें नए ज्ञान की जररुत है। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने दावा किया कि अर्थव्यवस्था को लेकर लोगों का नजरिया इतना नकारात्मक हुआ है कि मोदी सरकार के अपने पेशेवर समर्थक भी सार्वजनिक रूप से चिंता जाहिर कर रहे हैं। कांग्रेस नेता रमेश ने कहा कि महंगाई के अनुमान तेजी से बढ़ रहे हैं, जबकि विकास के अनुमान लगातार कम हो रहे हैं, इससे स्पष्ट होता है कि देश आर्थिक मोर्चे पर जूझ रहा है। कांग्रेस नेता रमेश ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में लगातार गिरावट और आपूर्ति श्रृंखलाओं के गंभीर कुप्रबंधन का जिक्र किया। उन्होंने कटाक्ष कर कहा कि स्थिति यह है कि प्रधानमंत्री मोदी को अब उपभोक्ताओं से उपभोग कम करने का आग्रह करना पड़ रहा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि ये चिंताएं नई नहीं हैं, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इन्हें लंबे समय से उठा रही है, जिसमें सुस्त निवेश माहौल सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को टॉफियां भेंट करने का उदाहरण देकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इसतरह के कार्यों और जनता से धार्मिक अपील करने में व्यस्त हैं, जबकि देश के सामने गंभीर आर्थिक चुनौतियां हैं। कांग्रेस नेता रमेश ने जोर दिया कि निजी निवेश की दर में उल्लेखनीय वृद्धि के बिना उच्च आर्थिक विकास को गति देना और बनाए रखना संभव नहीं है। उन्होंने समझाया कि वास्तविक वेतन स्थिर बने हुए हैं, जिससे सभी आय वर्गों में उपभोग की वृद्धि बाधित हो रही है। उपभोक्ता मांग के अभाव में, भारतीय कंपनियों के पास निवेश करने का कोई प्रोत्साहन नहीं है, जिससे निजी निवेश अटक गया है। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि देश के पैरों तले जमीन खिसक रही है और आर्थिक नीति-निर्माण में आमूलचूल परिवर्तन की आवश्यकता है। हालांकि, मोदी सरकार के पास हमेशा की तरह आत्म-प्रशंसा के सिवा कोई नया विचार नहीं है। कांग्रेस नेता रमेश ने चुटकी लेकर कहा कि प्रधानमंत्री भले ही ज्ञानेश (मुख्य चुनाव आयुक्त) के माध्यम से चुनाव करा रहे हों, लेकिन अर्थव्यवस्था के लिए उन्हें एक नए ज्ञान की तत्काल आवश्यकता है। आशीष दुबे / 21 मई 2026