अंतर्राष्ट्रीय
22-May-2026
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-यूएई के ‘वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन प्रोजेक्ट’ से होर्मुज की टेंशन होगी खत्म अबू धाबी,(ईएमएस)। ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच जारी खींचतान की वजह से दुनिया का सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ बंद पड़ा है। इस वजह से पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल और गैस के दाम आसमान छू रहे हैं। इस बीच यूएई ने एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक खेला है, जिससे अब भारत जब चाहेगा, टोंटी खोलकर सीधे समुद्र के रास्ते तेल ले सकेगा, भले ही होर्मुज का रास्ता हमेशा के लिए ब्लॉक क्यों न हो जाए। बता दें यूएई पिछले कुछ समय से एक बेहद सीक्रेट तरीके से बड़े मिशन पर काम कर रहा था। इस प्रोजेक्ट का नाम है ‘वेस्ट-ईस्ट पाइपलाइन प्रोजेक्ट’। दरअसल यूएई की सरकारी तेल कंपनी ‘एडनॉक’ के सीईओ सुल्तान अल जाबेर ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि इस नई क्रूड ऑयल पाइपलाइन का काम 50 फीसदी से ज्यादा पूरा हो चुका है और इसे साल 2027 तक हर हाल में चालू करने के लिए काम को सुपरफास्ट स्पीड से आगे बढ़ाया जा रहा है। यूएई के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद ने खुद एडनॉक को आदेश दिया है कि इस प्रोजेक्ट को तय वक्त से पहले पूरा किया जाए, ताकि दुनिया के तेल बाजार पर होर्मुज संकट का कोई असर न पड़े। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक यूएई, सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों का ज्यादातर तेल पानी के जहाजों के जरिए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से होकर भारत और बाकी दुनिया तक पहुंचता था। ईरान इस संकरे समुद्री रास्ते के मुहाने पर बैठा है, जिसने फरवरी में हुए अमेरिकी-इजराइली हमलों के बाद से इस रास्ते को अपनी जहाजों के अलावा बाकी दुनिया के लिए पूरी तरह बंद कर रखा है। यूएई की ये नई पाइपलाइन तेल को खाड़ी के अंदरूनी हिस्सों से निकालकर सीधे फुजैरा पोर्ट तक पहुंचाएगी। फुजैरा पोर्ट ‘ओमान की खाड़ी’ के तट पर स्थित है, जो होर्मुज के बिल्कुल बाहर है। इसका मतलब तेल सीधा जमीन के रास्ते पाइपलाइन से फुजैरा पहुंचेगा और वहां से भारतीय जहाजों में लोड होकर सीधे भारत जाएगा। जहाजों को खतरनाक होर्मुज जलमार्ग के अंदर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। इसका सबसे बड़ा और सीधा फायदा आपकी जेब को होने वाला है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल बाहर से खरीदता है। जब यूएई से तेल बिना किसी रुकावट के फुजैरा पोर्ट के रास्ते सीधे भारत आने लगेगा तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ेगी। सप्लाई बढ़ते ही तेल के दाम नीचे आएंगे। तेल सस्ता होने का सीधा मतलब है कि देश में मालभाड़ा कम होगा, जिससे फल, सब्जी और राशन समेत हर चीज की कीमतें काबू में आ जाएंगी। यानी यूएई ने होर्मुज की जो काट निकाली है, उससे भारत की अर्थव्यवस्था को एक बहुत बड़ा सुरक्षा कवच मिल गया है। सिराज/ईएमएस 22 मई 2026