बिलासपुर (ईएमएस)। आकाशवाणी के गौरवशाली 90 वर्षों के उपलक्ष्य में बुधवार सुबह बिलासपुर ने इतिहास के साथ कदम मिलाए। सुबह 7 बजे आकाशवाणी परिसर से शुरू हुए भव्य वॉकाथॉन में शहर ने रेडियो की उस विरासत का उत्सव मनाया, जिसने पीढयि़ों को जोड़ा, संवेदनाओं को आवाज दी और समाज को संवाद का सबसे विश्वसनीय माध्यम दिया। करीब 200 से अधिक लोगों की मौजूदगी ने इस आयोजन को केवल एक मैराथन नहीं रहने दिया, बल्कि इसे शहर की सांस्कृतिक चेतना और आकाशवाणी के प्रति भावनात्मक जुड़ाव का सार्वजनिक उत्सव बना दिया। आकाशवाणी परिवार, कर्मचारी, उद्घोषक, कंपेयर, बच्चे, युवा, वरिष्ठ नागरिक और शहर के अनेक गणमान्य लोग इसमें शामिल हुए। वॉकाथॉन आकाशवाणी परिसर से प्रारंभ होकर नूतन चौक, सीपत चौक, मुक्तिधाम सिग्नल चौक होते हुए लगभग साढ़े तीन किलोमीटर का सफर तय कर पुन: आकाशवाणी परिसर पहुंचा। पूरे रास्ते प्रतिभागियों में उत्साह, ऊर्जा और रेडियो के प्रति आत्मीयता दिखाई दी। मुख्य अतिथि कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि बदलते तकनीकी दौर में भी रेडियो की प्रासंगिकता कम नहीं हुई, बल्कि और अधिक मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि आज भी दूरस्थ क्षेत्रों में रेडियो सबसे विश्वसनीय सूचना माध्यम है। रेडियो केवल समाचार या मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज की धडकऩ है, जो हर परिस्थिति में लोगों तक पहुंचती है। उन्होंने कहा कि आकाशवाणी ने दशकों से देश की संस्कृति, साहित्य, लोकभाषा और जनसंवाद को जीवित रखने का काम किया है। विशिष्ट अतिथि रजनेश सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि रेडियो जीवन के हर क्षेत्र से जुड़ा माध्यम है, जो लगातार लोगों को जोड़ता रहा है। उन्होंने कहा कि आवाज़ को जन-जन तक पहुंचाने की सबसे भरोसेमंद ताकत आज भी रेडियो ही है। उन्होंने रेडियो को चलता-फिरता विद्यालय बताते हुए कहा कि यह केवल संगीत और मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संवेदना और देश-दुनिया को जोडऩे वाली जीवंत कड़ी है। कार्यक्रम प्रमुख डॉ. सुप्रिया भारतीय ने बताया कि आकाशवाणी के 90 वर्ष केवल एक संस्थान की यात्रा नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक स्मृतियों, भावनाओं और सामाजिक चेतना की यात्रा है। उन्होंने कहा कि पहली बार आकाशवाणी परिवार स्टूडियो की सीमाओं से बाहर निकलकर सीधे शहर और समाज के बीच पहुंचा है। यह आयोजन रेडियो और नागरिकों के बीच उस आत्मीय रिश्ते का उत्सव है, जो समय के साथ और मजबूत हुआ है। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों का मेडल देकर सम्मान किया गया। यह सम्मान डॉ. अजय पांडे के सहयोग से प्रदान किया गया। आयोजन की रूपरेखा तैयार करने में डॉ. सुप्रिया भारतीय के साथ मनाली ठाकरे, जनता साहू, सौरभ शेरवानी और लीला तिवारी की विशेष भूमिका रही। वहीं तकनीकी एवं सोशल मीडिया सहयोग में पवन भाई, गौरीशंकर कौशिक, पत्रिका साहू, मनीष सलाम, श्रुति साहू और भूपेश कंवर की अहम सहभागिता रही। कार्यक्रम संचालन में सुनील कश्यप, गीता महावीर, अदिति प्रभात और जानकी परिवार ने भूमिका निभाई। आयोजन सहयोग में रमेश, गोविंद, बालेश्वर, कमल, अशोक और विकास सक्रिय रहे। आकाशवाणी द्वारा आयोजित यह वॉकाथॉन केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि उन 90 वर्षों की जीवंत यात्रा का सार्वजनिक उत्सव बन गया, जिसने अनगिनत आवाजों को पहचान दी और करोड़ों लोगों के जीवन में संवाद की रोशनी पहुंचाई। मनोज राज 22 मई 2026