क्षेत्रीय
22-May-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। राजधानी रायपुर में वातानुकूलित सभागार के भीतर लोक निर्माण विभाग के सचिव मुकेश कुमार बंसल अधिकारियों को गुणवत्ता, पारदर्शिता, तकनीकी दक्षता और तेजी का पाठ पढ़ा रहे थे, लेकिन दूसरी ओर बिलासपुर की सडक़ें विभागीय दावों की हकीकत बयां करती नजर आ रही हैं। शहर की कई सडक़ें धूल, गड्ढों और उखड़ते डामर से लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं। बैठकों और प्रस्तुतियों में आधुनिक तकनीक, डिजिटल निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि यदि निगरानी व्यवस्था इतनी मजबूत है तो नई बनी सडक़ें कुछ ही महीनों में क्यों टूटने लगती हैं। कहीं डामर बह रहा है, कहीं सडक़ किनारे धंस रहे हैं तो कहीं बारिश शुरू होने से पहले ही गड्ढे उभर आए हैं। फाइलों में चमक, जमीन पर बदहाली शहर के कई इलाकों में सडक़ निर्माण की स्थिति खराब बताई जा रही है। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों का सही पालन नहीं हो रहा। सडक़ें बनते ही टूटने लगती हैं और विभाग कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस और कागजी औपचारिकता तक सीमित दिखाई देता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विभागीय निगरानी सिर्फ बैठकों और रिपोर्टों तक सीमित रह गई है। जमीनी स्तर पर निरीक्षण और जवाबदेही नजर नहीं आती। तेजी पर उठ रहे सवाल बैठक में निर्माण कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया गया, लेकिन शहर के लोग इसे लेकर तंज कस रहे हैं। उनका कहना है कि कई परियोजनाओं में तेजी का मतलब गुणवत्ता से समझौता कर जल्दबाजी में काम पूरा करना बन गया है। परिणामस्वरूप सडक़ें थोड़े समय में ही खराब होने लगती हैं और जनता को परेशानी उठानी पड़ती है। लोगों का आरोप है कि ठेकेदारों पर सख्ती के दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तविक कार्रवाई बहुत कम दिखाई देती है। हादसों का खतरा बढ़ा शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की कई सडक़ें खराब स्थिति में हैं। धूल और गड्ढों के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खराब सडक़ों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि राजधानी की परियोजनाओं की समीक्षा हो सकती है तो बिलासपुर की बदहाल सडक़ों पर भी गंभीरता से ध्यान क्यों नहीं दिया जा रहा। जनता की मांग— बिना प्रोटोकॉल करें निरीक्षण नागरिकों का कहना है कि यदि विभागीय अधिकारी वास्तव में गुणवत्ता की वास्तविक स्थिति देखना चाहते हैं तो उन्हें बिना पूर्व सूचना और बिना प्रोटोकॉल के बिलासपुर की सडक़ों का निरीक्षण करना चाहिए। तभी फाइलों में दिखाई जा रही गुणवत्ता और जमीन की वास्तविक स्थिति का अंतर साफ नजर आएगा। मनोज राज 22 मई 2026