नई दिल्ली (ईएमएस)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक त्रासदी और दबाने के प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जवाबदेह ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और उसका तंत्र, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित परीक्षाओं में सामने आई व्यापक अनियमितताओं के सबूतों को दबाने का प्रयास कर रहा है, और प्रक्रिया में प्रश्नपत्र लीक माफिया के साथ मिलीभगत कर रहा है। कांग्रेस नेता रमेश की कड़ी टिप्पणी एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह के उन बयानों के बाद आई है, जिसमें उन्होंने एक संसदीय स्थायी समिति को बताया था कि नीट-यूजी परीक्षा का प्रश्नपत्र पूरी तरह से लीक नहीं हुआ था, बल्कि परीक्षा से पहले केवल कुछ प्रश्न ही सामने आए थे। इस दावे पर सवाल उठाकर कांग्रेस नेता रमेश ने कहा कि अगर परीक्षा में पूछे गए दर्जनों प्रश्नों वाला एक अनुमानित प्रश्नपत्र परीक्षा की तारीख से काफी पहले छात्रों के बीच प्रसारित हो रहा था, तब यह स्पष्ट रूप से लीक है। उन्होंने पूछा, अगर यह लीक नहीं है, तब क्या है? मोदी सरकार अब इसे क्यों नकारने की कोशिश कर रही है? कांग्रेस नेता ने 2018 में एनटीए के गठन के बाद से, मोदी सरकार पर एजेंसी द्वारा आयोजित परीक्षाओं में धोखाधड़ी की सच्चाई को दबाने के लिए प्रश्नपत्र लीक माफिया के साथ सांठगांठ करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि नीट-यूजी 2024 में हुई पिछली अनियमितताओं पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण 2026 के विवाद में भी इसी तरह की धोखाधड़ी की घटनाएं फिर से सामने आईं। रमेश ने एनटीए को राष्ट्रीय आघात एजेंसी करार देकर शिक्षा मंत्रालय के अधीन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई), राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) और केंद्रीय विश्वविद्यालयों जैसे अन्य संस्थानों में भी व्यवस्थागत विफलता का आरोप लगाया। उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को निशाना बनाकर कहा कि वे एक ऐसी व्यवस्था की अध्यक्षता कर रहे हैं जहाँ पेशेवर उत्कृष्टता को नजरअंदाज किया जाता है और वैचारिक जुड़ाव को प्राथमिकता मिलती है। आशीष दुबे / 22 मई 2026