22-May-2026
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दमोह (ईएमएस) । रीवा कलेक्ट्रेट के सामने दो जैन साध्वीयो की सड़क हादसे में समाधि हो जाने से सकल जैन समाज में शोक की लहर के साथ क्षोभ भरा माहौल बना हुआ है। इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने गुणायतन प्रणेता मुनि श्री प्रमाण सागर जी के आवाहन पर 25 मई को पूरे देश में जैन समाज द्वारा जिला मुख्यालय पर मौन जुलूस निकालकर ज्ञापन सोपा जाएगा। इसी कड़ी में दमोह जिला मुख्यालय पर मुनिश्री पदम सागर जी के ससंघ निर्देशन में सकल जैन समाज के द्वारा सोमवार प्रात 8 बजे मौन जुलूस निकालकर ज्ञापन सोपा। जिसको लेकर श्री पारसनाथ दिगंबर जैन नन्हे मंदिर जी में शुक्रवार को आयोजित धर्म सभा के दौरान मुनि श्री पदम सागर जी द्वारा समाज जनों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए। साथ ही इस मौन जूलूस ज्ञापन में विभिन्न हिंदू संगठनों सहित सर्व समाज की सहभागिता की अपील एवं अपेक्षा करते हुए कहां गया कि साधु संत किसी समाज विशेष के नहीं बल्कि सर्व समाज के साथ संपूर्ण जीव जगत एवं राष्ट्र कल्याण की भावना से कार्य करते हैं। ऐसे में भविष्य में किसी भी समाज के साधु संतों के साथ इस तरह की घटना दुर्घटना की पुनरावृत्ति न हो इस भावना से यह मौन जुलूस निकालकर ज्ञापन दिया जा रहा है। इधर श्री सम्मेदशिखर तीर्थराज स्थित गुणायतन में विराजमान राष्ट्रीय संत मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने रीवा में घटी हृदय विदारक घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि ष्यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि पूरे समाज को झकझोर देने वाली घटना हैष् उन्होंने कहा कि केवल शोक संदेश, संवेदनाएँ अथवा श्रद्धांजलि देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह घटना सम्पूर्ण समाज के लिए गंभीर चिंतन का विषय छोड़ गई है।मुनि श्री ने कहा कि आज ऐसी घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं और साधु-संतों के जीवन पर संकट दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि त्याग, तपस्या और संयम साधना का जीवन जीने वाले तथा समाज को प्रेम और अहिंसा का संदेश देने वाले पदविहारी साधु-संतों के साथ यदि इस प्रकार की घटनाएँ घटित होती रहेंगी,तो यह किसी भी दृष्टि से सहन करने योग्य नहीं है।उन्होंने कहा कि हर बार घटना के बाद लोग शोक व्यक्त करते हैं, कुछ दिन चर्चा होती है और फिर सब कुछ शांत हो जाता है, लेकिन कुछ समय बाद पुनः कोई दूसरी घटना सामने आ जाती है। आखिर यह सिलसिला कब तक चलता रहेगा? अब समाज को केवल मौन दर्शक बने रहने के बजाय संगठित होकर ठोस कदम उठाने होंगे। इसी उद्देश्य से उन्होंने पूरे देश में “साधु-संत सुरक्षाअभियान” चलाने का प्रस्ताव रखा तथा संपूर्ण देश में 25 मई सोमवार को प्रातःकाल एक निश्चित समय पर समस्त जैन समाज द्वारा व्यापक जनजागरण अभियान संचालित करने की बात कही। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रथम चरण में देशभर में मौन रैलियाँ, कैंडल मार्च एवं ज्ञापन अभियान आयोजित किए जाएँ। पुरुष सफेद वस्त्र तथा महिलाएँ केसरिया वस्त्र धारण कर शांतिपूर्ण ढंग से रैलियाँ निकालें और जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन सौंपें। मुनि श्री ने कहा कि ज्ञापन केवल एक घटना तक सीमित न होकर ठोस मांगों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यह ज्ञापन जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, मानवाधिकार आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, प्रधानमंत्री कार्यालय एवं गृह मंत्रालय को भेजे जाएँ। इनमें साधु-संतों की सुरक्षा हेतु विशेष व्यवस्था, निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच, आवश्यकता पड़ने पर एसआईटी गठन, सीसीटीवी एवं डिजिटल साक्ष्यों की सुरक्षा, आरोपियों पर कठोर धाराओं में कार्रवाई तथा यदि षड्यंत्र सिद्ध हो तो हत्या की धाराओं में दंड की मांग की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार को “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करना चाहिए। विहार मार्गों पर पुलिस समन्वय, संवेदनशील मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक नियंत्रण, हाईवे पर स्पीड कंट्रोल तथा धार्मिक पदयात्रियों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्पष्ट गाइडलाइन बनाई जानी चाहिए। साथ ही साधु-संतों पर होने वाले अपराधों को “विशेष संवेदनशील अपराध” घोषित किया जाए, क्योंकि साधु-संत आत्मरक्षा नहीं करते, उनका किसी से वैर नहीं होता और वे केवल शांति एवं अहिंसा का संदेश देते हैं। मुनि श्री ने दिगंबर एवं श्वेतांबर समाज से एकजुट होकर इस विषय पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान करते हुए कहा कि हम सभी को यह संकल्प लेना होगा कि भविष्य में किसी भी साधु-संत, मुनि अथवा आर्यिकाओं को ऐसी घटनाओं का शिकार नहीं बनने देंगे। उन्होंने कहा कि हर शहर और गाँव में “संतों की सड़क सुरक्षा हेतु प्रकोष्ठ” बनाए जाएँ, ताकि संतों के विहार के समय प्रशिक्षित स्वयंसेवक उनके साथ चलें। स्वयंसेवक विशेष जैकेट पहनें ताकि दूर से उनकी पहचान हो सके तथा पीछे सुरक्षा वाहन भी रहे।उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के पीछे तेज रफ्तार, असहिष्णुता, सड़क अव्यवस्था और कहीं-कहीं दुर्भावना जैसे कारण भी दिखाई देते हैं। इन सभी कारणों के निवारण के लिए समाज और शासन दोनों को गंभीरता से कार्य करने की आवश्यकता है। सोशल मीडिया पर केवल आक्रोश व्यक्त करने से समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि योजनाबद्ध और संगठित प्रयास करने होंगे। मुनि श्री ने कहा कि अभी समय है जागने का। यदि आज समाज संगठित होकर ठोस कदम उठाएगा, तभी भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सकेगी। अन्यथा केवल शोक और संवेदनाओं तक सीमित रह जाने से कोई परिणाम नहीं निकलेगा।