भारत के साथ आया ऑस्ट्रेलिया नई दिल्ली(ईएमएस)। ईरान और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के चलते दुनिया भर में एनर्जी कॉरिडोर के नाम से मशहूर होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस वैश्विक संकट के कारण भारत जैसे देश तेजी से विकास कर रहे देशों को ऊर्जा आपूर्ति के मोर्चे पर गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस संवेदनशील मुद्दे को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बैठक में पूरी मजबूती से उठाया था, जहां दोनों देशों ने होर्मुज से निर्बाध व्यापारिक आवाजाही की आवश्यकता पर जोर दिया। अब इस संकट के बीच रणनीतिक गठबंधन क्वाड के सदस्य देशों ने भी निर्बाध समुद्री व्यापार का खुला समर्थन किया है, और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वांग ने भारत दौरे से पहले इस साझेदारी को लेकर बेहद महत्वपूर्ण बयान दिया है। ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वांग ने अपने भारत दौरे से ठीक पहले जारी एक बयान में वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को बेहद अनिश्चित करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में क्वाड देशों—भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका—की आपसी साझेदारी और अधिक प्रासंगिक हो गई है। ये चारों लोकतांत्रिक देश मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र के शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध भविष्य को आकार देने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। पेनी वांग भारत में आयोजित होने वाली क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगी और इसके साथ ही वे भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ 17वें ऑस्ट्रेलिया-भारत विदेश मंत्रियों के फ्रेमवर्क संवाद की सह-अध्यक्षता भी करेंगी। समुद्री सुरक्षा और नियम-आधारित व्यवस्था को बनाए रखने पर जोर देते हुए ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री ने कहा कि चारों देशों के बीच सहयोग अब पहले से कहीं अधिक मजबूत हो रहा है। क्वाड देश केवल रणनीतिक बातें नहीं कर रहे, बल्कि समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति, बुनियादी ढांचे के विकास और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में ठोस और जमीनी परिणाम दे रहे हैं। उन्होंने भारत और ऑस्ट्रेलिया के द्विपक्षीय संबंधों को ऐतिहासिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण दौर में बताते हुए कहा कि दोनों देश व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा संक्रमण, रणनीतिक प्रौद्योगिकी और कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में अपनी साझेदारी को और गहरा कर रहे हैं। पेनी वांग ने रेखांकित किया कि तेजी से अस्थिर हो रही वैश्विक परिस्थितियों और समुद्री चुनौतियों के बीच यह रणनीतिक गठबंधन क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है। भारत में होने वाली इस उच्च-स्तरीय बैठक में होर्मुज संकट के अलावा आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाने, उभरती हुई तकनीकों और हिंद-प्रशांत रणनीति पर गहन चर्चा होने की पूरी संभावना है, जो भविष्य के वैश्विक व्यापार की दिशा तय करेगी। वीरेंद्र/ईएमएस/25मई 2026