लेख
25-May-2026
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डीडी किसान : 11 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा, जिसने खेत-खलिहानों को दिया ज्ञान, विश्वास और नई दिशा भारत केवल शहरों और महानगरों का देश नहीं है।इसकी वास्तविक आत्मा गांवों में बसती है,जहाँ खेतों की हरियाली,किसान का श्रम और ग्रामीण संस्कृति मिलकर राष्ट्र की आर्थिक शक्ति को मजबूत बनाते हैं।भारतीय लोकतंत्र की जड़ें यदि गाँवों में हैं,तो गाँवों की धड़कन किसान है।यही कारण है कि खेती, किसान और ग्रामीण भारत से जुड़ी सूचना,शिक्षा और जागरूकता का महत्व अत्यंत बढ़ जाता है।इसी आवश्यकता को समझते हुए 26 मई 2015को भारत के सार्वजनिक सेवा प्रसारक दूरदर्शन ने “डीडी किसान” चैनल की शुरुआत की थी।आज यह चैनल अपनी सफलतापूर्वक 11 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पूरी कर चुका है। यह केवल एक टेलीविजन चैनल नहीं,बल्कि भारतीय कृषि समाज की आवाज,किसानों का साथी और ग्रामीण भारत का विकास मंच बन चुका है।डीडी किसान की शुरुआत ऐसे समय हुई थी जब भारतीय कृषि अनेक चुनौतियों से जूझ रही थी।जलवायु परिवर्तन, अनिश्चित मानसून,खेती की बढ़ती लागत, घटती कृषि योग्य भूमि,बाजार की अस्थिरता और वैज्ञानिक जानकारी के अभाव जैसी समस्याएँ किसानों को प्रभावित कर रही थीं।ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल जागरूकता सीमित थी और अधिकांश किसान परंपरागत अनुभवों के आधार पर खेती कर रहे थे।ऐसे समय में किसानों के लिए समर्पित 24×7 चैनल की शुरुआत अपने आप में ऐतिहासिक कदम था।इस चैनल का उद्देश्य केवल कृषि समाचार देना नहीं था,बल्कि “किसान को सूचना से सशक्त” बनाना था।यही कारण है कि डीडी किसान ने खेती को परंपरागत सीमाओं से निकाल कर आधुनिक विज्ञान,तकनीक और बाजार व्यवस्था से जोड़ने का कार्य किया।भारत दुनिया की सबसे बड़ी कृषि अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। देश की बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है।ऐसे विशाल कृषि समाज के लिए समर्पित राष्ट्रीय चैनल की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।डीडी किसान ने इस आवश्यकता को पूरा करते हुए किसानों तक उपयोगी और वैज्ञानिक जानकारी पहुँचाने का सशक्त माध्यम तैयार किया।डीडी किसान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसने किसानों को “सूचना का अधिकार” व्यवहारिक रूप में प्रदान किया। वर्षों तक किसान केवल स्थानीय अनुभवों और सीमित जानकारी पर निर्भर रहते थे,लेकिन इस चैनल ने खेती को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखने की नई सोच विकसित की। मौसम आधारित खेती,जल संरक्षण,ड्रिप इरिगेशन,प्राकृतिक खेती, जैविक उर्वरकों का उपयोग, फसल विविधीकरण, मधुमक्खी पालन,मत्स्य पालन,डेयरी उद्योग और कृषि आधारित स्वरोजगार जैसे विषयों को लगातार प्रमुखता दी गई।चैनल के लोकप्रिय कार्यक्रम “मौसम खबर”और“मंडी समाचार” किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुए।“मौसम खबर” में विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों के अनुसार मौसम पूर्वानुमान और फसल आधारित सलाह दी जाती रही, जबकि “मंडी समाचार” ने किसानों को विभिन्न मंडियों के भाव और बाजार की जानकारी देकर बेहतर निर्णय लेने में सहायता प्रदान की।डीडी किसान ने किसानों को खेती की बदलती तकनीकों से भी जोड़ा। आज देश का किसान मोबाइल एप, ड्रोन तकनीक,मिट्टी परीक्षण, माइक्रो इरिगेशन,डिजिटल मंडी और प्राकृतिक खेती जैसे आधुनिक कृषि शब्दों से परिचित है।इस जागरूकता के पीछे जनसंचार माध्यमों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है,जिसमें डीडी किसान अग्रणी रहा।चैनल ने केवल खेती तक अपने कार्यक्रम सीमित नहीं रखे, बल्कि ग्रामीण जीवन के व्यापक विकास को भी केंद्र में रखा।महिला स्वयं सहायता समूह,ग्रामीण उद्यमिता,डिजिटल भुगतान,कौशल विकास,ग्रामीण स्वास्थ्य,शिक्षा और सरकारी योजनाओं की जानकारी जैसे विषयों को भी प्रमुखता दी गई।यही कारण है कि यह चैनल “कृषि चैनल” से आगे बढ़कर “ग्रामीण भारत का विकास चैनल” बन गया।डीडी किसान की एक प्रेरक पहल “सफल किसान” कार्यक्रम रहा। इसमें देशभर के उन किसानों की कहानियाँ दिखाई गईं जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद आधुनिक तकनीक अपनाकर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की।किसी किसान ने जैविक खेती से लाखों की आय अर्जित की, तो किसी ने मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन और मत्स्य पालन को रोजगार का माध्यम बनाया।इन वास्तविक कहानियों ने लाखों किसानों के भीतर आत्मविश्वास जगाया।भारत में दूरदर्शन की परंपरा स्वयं अत्यंत गौरवशाली रही है।वर्ष 1967 में शुरू हुआ “कृषि दर्शन” कार्यक्रम भारतीय टेलीविजन इतिहास के सबसे लंबे समय तक चलने वाले कार्यक्रमों में गिना जाता है।डीडी किसान ने उसी परंपरा को आधुनिक स्वरूप और 24 घंटे की निरंतरता प्रदान की।डीडी किसान की एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसने कृषि वैज्ञानिकों,शोध संस्थानों और किसानों के बीच सीधा संवाद स्थापित किया।कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि विज्ञान केंद्रों से जुड़े विशेषज्ञों को मंच देकर चैनल ने वैज्ञानिक शोध को खेतों तक पहुँचाने का कार्य किया।इससे “लैब टू लैंड” की अवधारणा को मजबूती मिली।आज डिजिटल मीडिया के युग में भी डीडी किसान का महत्व कम नहीं हुआ है।देश के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी दूरदर्शन और डीडी फ्री डिश की पहुँच अत्यंत व्यापक है।सीमित संसाधनों वाले किसान परिवारों तक निःशुल्क पहुँचने की क्षमता ने इस चैनल को विशेष रूप से प्रभावशाली बनाया है।यही इसकी सबसे बड़ी सामाजिक शक्ति है।ग्रामीण भारत में आज भी ऐसे लाखों परिवार हैं जहाँ निजी डिजिटल प्लेटफॉर्म या महँगे चैनल उपलब्ध नहीं हैं,लेकिन डीडी किसान उनके घर तक पहुँचता है।यही कारण है कि इसकी विश्वसनीयता लगातार बनी हुई है।डीडी किसान ने प्राकृतिक खेती और जैविक खेती को लोकप्रिय बनाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।पिछले कुछ वर्षों में रसायन मुक्त खेती,देसी बीजों के संरक्षण और मोटे अनाज यानी मिलेट्स के प्रति बढ़ती जागरूकता में जनसंचार माध्यमों की बड़ी भूमिका रही है।चैनल ने लगातार मिलेट्स, गो आधारित खेती और पर्यावरण संतुलन जैसे विषयों को प्रसारित कर कृषि को सतत विकास से जोड़ने का प्रयास किया।जल संकट और बदलते जलवायु परिदृश्य को देखते हुए चैनल ने “पर ड्रॉप मोर क्रॉप”,सूक्ष्म सिंचाई और वर्षा जल संचयन जैसी तकनीकों को भी प्रमुखता दी।खेती में पानी बचाने की तकनीकों पर आधारित कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय हुए।डीडी किसान ने ग्रामीण महिलाओं की भूमिका को भी नई पहचान दी।खेतों से लेकर पशुपालन और खाद्य प्रसंस्करण तक ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।चैनल ने महिला किसानों और स्वयं सहायता समूहों की सफलता की कहानियों को सामने लाकर उन्हें प्रेरणा का स्रोत बनाया। वैश्विक महामारी कोविड- 19 महामारी के दौरान डीडी किसान किसानों के लिए भरोसेमंद सूचना माध्यम बनकर उभरा। लॉकडाउन के समय किसानों के सामने फसल कटाई,श्रमिक संकट और परिवहन जैसी समस्याएँ थीं।उस समय चैनल ने किसानों तक आवश्यक जानकारी पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।उस दौर में यह चैनल ग्रामीण भारत की सूचना जीवनरेखा बन गया था।तकनीकी दृष्टि से भी डीडी किसान ने समय के साथ स्वयं को बदला है।हाल के वर्षों में चैनल ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक प्रस्तुति शैली को अपनाया।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एआई एंकर “एआई कृष” और “एआई भूमि” की शुरुआत ने इसे तकनीकी नवाचार की दिशा में भी अग्रणी बना दिया।यह इस बात का संकेत है कि भारतीय कृषि संचार भी तेजी से डिजिटल भविष्य की ओर बढ़ रहा है।डीडी किसान की 11 वर्षों की यात्रा वास्तव में भारतीय कृषि संचार क्रांति की कहानी है।यह यात्रा केवल एक चैनल की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की सफलता है जिसमें किसान को राष्ट्र निर्माण का केंद्र माना गया।आज भारत “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।ऐसे समय में कृषि क्षेत्र की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला किसान ही हैं।इसलिए किसानों को सशक्त बनाना केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दायित्व भी है।डीडी किसान ने इन 11 वर्षों में यह सिद्ध किया है कि यदि सही जानकारी सही समय पर किसानों तक पहुँचे,तो खेती केवल जीविका का साधन नहीं,बल्कि सम्मान और समृद्धि का मार्ग भी बन सकती है। खेतों से लेकर शोध प्रयोगशालाओं तक,गाँवों से लेकर नीति निर्माण तक,इस चैनल ने संवाद का ऐसा पुल तैयार किया है जिसने भारतीय कृषि समाज को नई दिशा दी है।यह भी उल्लेखनीय है कि जिस समय निजी चैनल मनोरंजन आधारित कार्यक्रमों की दौड़ में लगे हुए थे,उसी समय डीडी किसान देश के उस वर्ग को केंद्र में रख रहा था जो वास्तव में भारत की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ है।यह भारतीय सार्वजनिक प्रसारण व्यवस्था की सामाजिक जिम्मेदारी और जनसेवा की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है।आने वाले समय में आवश्यकता इस बात की है कि डीडी किसान को और अधिक तकनीकी संसाधन,क्षेत्रीय भाषाई विस्तार और डिजिटल पहुँच प्रदान की जाए ताकि यह देश के हर किसान तक और अधिक प्रभावी ढंग से पहुँच सके।अलग-अलग राज्यों की कृषि परिस्थितियों के अनुसार स्थानीय भाषाओं में कार्यक्रमों का विस्तार भविष्य की बड़ी आवश्यकता होगी।कृषि केवल अन्न उत्पादन का माध्यम नहीं है।यह भारत की संस्कृति, सभ्यता और आत्मनिर्भरता का आधार है।खेतों की मिट्टी में केवल अन्न नहीं उगता,बल्कि देश का भविष्य भी आकार लेता है।डीडी किसान की 11 वर्षों की यह गौरवशाली यात्रा वास्तव में भारतीय किसान के संघर्ष,श्रम और आत्मविश्वास को समर्पित यात्रा है। यह चैनल आने वाले वर्षों में भी किसानों के जीवन में नई उम्मीद, नई जानकारी और नई ऊर्जा का संचार करता रहेगा।अंततः कहा जा सकता है कि भारतीय जनसंचार के इतिहास में डीडी किसान ने जो भूमिका निभाई है,वह केवल प्रसारण तक सीमित नहीं है।यह ग्रामीण भारत के उत्थान,कृषि चेतना और आत्म निर्भर भारत के निर्माण की एक जीवंत गाथा बन चुका है।सच मायनों में डीडी किसान आज भारत की मिट्टी की आवाज बन गया है-ऐसी आवाज, जो खेतों से उठती है,किसानों के सपनों से जुड़ती है और राष्ट्र के भविष्य को मजबूत बनाती है। (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 25 मई /2026