राष्ट्रीय
25-May-2026
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कल होने वाली बैठक के एजेंडे में संगठनात्मक और चुनावी रणनीतियां शामिल बैंग्लुरु,(ईएमएस)। कर्नाटक कांग्रेस में सीएम पद को लेकर चल रही अंदरूनी कलह और खींचतान के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। मंगलवार को सीएम सिद्धारमैया को दिल्ली बुलाया है, जहां वे कांग्रेस आलाकमान के साथ बैठक करेंगे। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि अपनी इस यात्रा के दौरान सिद्धारमैया कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी से भी मुलाकात कर सकते हैं। बुलावे के बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही अटकलें एक बार फिर तेज हो गई हैं। आधिकारिक तौर पर इस बैठक के एजेंडे में आगामी संगठनात्मक और चुनावी रणनीतियां शामिल हैं। माना जा रहा है कि सिद्धारमैया आलाकमान के साथ बैठक में इन मुख्य विषयों पर चर्चा कर सकते हैं जिसमें आगामी राज्यसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों के चयन और रणनीति पर बात होना तय है। कर्नाटक में होने वाले आगामी विधान परिषद चुनावों की तैयारियों और टिकट बंटवारे को लेकर भी मंथन होगा। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन चुनावों के बहाने असली बातचीत राज्य सरकार के नेतृत्व और सीएम की कुर्सी को लेकर होना है। बता दें इससे पहले 20 मई को, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सिद्धारमैया और शिवकुमार के साथ बातचीत की थी। सूत्रों के मुताबिक खड़गे तिरुवनंतपुरम से सिद्धारमैया, शिवकुमार और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बेंगलुरु आए थे। बाद में सोमवार को उन्होंने राज्य के ऊर्जा मंत्री के जे जॉर्ज के आवास पर चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में राज्य में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों और सीएम पद को लेकर चल रही लगातार अटकलों पर चर्चा हुई। यह घटनाक्रम कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के तीन साल पूरे होने के बाद सामने आया। साथ ही, यह सीएम पद को लेकर सिद्धारमैया और उनके उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के बीच चल रही लंबी सत्ता की खींचतान के बीच हुआ है। पिछले साल नवंबर में जब कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल का आधा सफर पूरा कर लिया, तो नेतृत्व-साझेदारी का मुद्दा और भी जोर पकड़ गया। इससे इन दोनों वरिष्ठ नेताओं के बीच रोटेशनल मुख्यमंत्री की व्यवस्था को लेकर अटकलें फिर से तेज हो गईं हैं। बता दें पिछले 18 महीनों से शिवकुमार के समर्थक दावा करते आ रहे हैं कि वह जल्द ही सीएम का पद संभाल लेंगे, हालांकि अभी तक ऐसा कोई बदलाव नहीं हुआ है। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि पिछले तीन सालों से एक ही बात दोहराई जा रही है। राज्य इकाई के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। कई नेता आलाकमान से आग्रह कर रहे हैं कि इस भ्रम को जल्द से जल्द खत्म किया जाए। उनका तर्क है कि यह लंबी अनिश्चितता कर्नाटक में पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। अब तक केंद्रीय नेतृत्व ने कई कारणों का हवाला देते हुए इस पर कोई अंतिम फैसला लेने से परहेज़ किया है। सिराज/ईएमएस 25मई26