लेख
26-May-2026
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देश के मुख्य न्यायधीश जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद शुरू हुआ सोशल मीडिया अभियान कॉकरोच जनता पार्टी अब युवाओं के लिए बड़ा आंदोलन शुरू करने की तैयारी में है। पार्टी ने खुद इस बात का ऐलान किया है। अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर 2 करोड़ से ज्यादा युवाओं को अपने साथ जोड़ने के बाद सीजेपी ने हाल ही में आने वाले दिनों के लिए रोडमैप जारी किया है। इसमें सीजेपी ने कहा है कि यह सिर्फ एक शुरुआत है और कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। इससे पहले इस मुहिम पर मुसीबतों की भी मार पड़ी है। पार्टी की वेबसाइट के खिलाफ एक्शन लिया गया है। वहीं सीजेपी के यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ी गतिविधियों की जांच का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में न्यायिक कार्यवाही के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए दावा किया गया है कि अदालत की कार्यवाही के दौरान की गई टिप्पणियों और विचारों का इस्तेमाल प्रचार के लिए किया जा रहा है। बता दें कि पिछले हफ्ते सीजेआइ सूर्यकांत ने एक मामले की सुनवाई के दौरान बेरोजगार युवाओं की तुलना कथित तौर पर कॉकरोच से कर दी थी, जिसके बाद विवाद शुरू हो गया।सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा था कि ऑनलाइन एक्टिविज्म की आड़ में व्यवस्था पर हमला करने वाले बेरोजगार युवा ‘कॉकरोच’ की तरह हैं। बाद में सीजेआई ने स्पष्ट किया था कि उनका इशारा फर्जी डिग्री रखने वाले लोगों की ओर था।सीजेपी के लिए समसामयिक खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका भी दायर हो गई है।सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक वकील ने जनहित याचिका दायर कर कॉकरोच जनता पार्टी के खिलाफ मामले की जल्द सुनवाई करने की मांग की। हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत ने वकील को मामले को भावनात्मक तरीके से न लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि उचित समय आने पर मामले की सुनवाई की जाएगी।याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता एन.के. गोस्वामी ने सीजेआई की तिलचट्टे वाली टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश की ओर से स्पष्टीकरण दिए जाने के बावजूद न्यापालिका को बदनाम करने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़कर और दुर्भावनापूर्ण तरीके से पेश किया जा रहा है। जनहित याचिका में निर्देश देने की मांग की गई है कि अदालत में होने वाली बातचीत का इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए न किया जाए और फर्जी वकीलों की डिग्रियों के मामले में सीबीआई जांच की जाए। इसी मामले पर एक अन्य जनहित याचिका में मुख्य न्यायाधीश की तिलचट्टे वाली टिप्पणी के बाद उभरे व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़ी गतिविधियों की सीबीआई जांच की मांग की गई है। आपको बता दें कॉकरोच जनता पार्टी एक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन राजनीतिक आंदोलन है, जो मई 2026 में सोशल मीडिया पर एक मीम के रूप में शुरू हुआ और तेजी से वायरल हो गया। शुरुआत और संस्थापक: इसकी शुरुआत मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले और अमेरिका के बोस्टन में पढ़ रहे अभिजीत दीपके द्वारा की गई थी। वह पहले आम आदमी पार्टी के लिए सोशल मीडिया का काम भी कर चुके हैं। विवाद की वजह: मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट में फर्जी डिग्री से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस ने कथित तौर पर टिप्पणी की थी कि कुछ बेरोजगार युवा सिस्टम में कॉकरोच की तरह घुस जाते हैं। हालांकि, बाद में स्पष्ट किया गया कि यह टिप्पणी केवल फर्जी डिग्री धारकों के लिए थी, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे बेरोजगार युवाओं के अपमान के रूप में लिया गया। सोशल मीडिया पर लोकप्रियता: इस टिप्पणी के बाद अभिजीत ने कॉकरोच जनता पार्टी नाम से अकाउंट बनाया। इसके तहत युवाओं, बेरोजगारों और सिस्टम से नाराज लोगों को एक साथ जोड़ने का अभियान चलाया गया, जिसके इंस्टाग्राम पर कुछ ही दिनों में करोड़ों फॉलोअर्स हो गए।कुछ ही दिनों में बड़ी तादाद फॉलोअर्स जुटाने वाली कॉकरोच जनता पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल बाद में निलंबित कर दिए गए। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस डिजिटल आंदोलन पर कार्रवाई का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि उनके सभी सोशल मीडिया अकाउंट और वेबसाइट को या तो हटा दिया गया है या उनसे छेड़छाड़ की गई है, जिससे समूह अपने किसी भी आधिकारिक प्लेटफॉर्म तक पहुंच नहीं पा रहा है। मुख्य मांग और विवाद: इस पार्टी की वेबसाइट पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर अभियान चलाया गया था और भारी संख्या में लोगों ने याचिका पर साइन किए थे। बाद में सीजेपी की आधिकारिक वेबसाइट को तकनीकी या सरकारी कारणों से बंद कर दिया गया।यह कोई वास्तविक या पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि युवाओं के गुस्से और असंतोष को व्यक्त करने का एक डिजिटल माध्यम है। अब पार्टी ने इंस्टाग्राम पर एक लंबे पोस्ट में यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी मुसीबतों के आगे घुटने नहीं टेकेगी। पार्टी ने लिखा, कॉकरोच सबसे बड़े सर्वाइवर होते हैं। ये अंधेरे कोनों मेंग भी पनपते हैं और हर परेशानी के बाद भी टिके रहते हैं। देश के युवाओं का हाल भी आज ऐसा ही है। लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई है, कॉकरोचेस ने तो अभी सिर्फ शुरुआत की है। सीजेपी ने कहा है कि इस मुहिम एक आंदोलन में बदलने जा रहे हैं। सीजेपी ने कहा है कि उनकी विचारधारा भारत के संविधान से प्रेरित है। वे महात्मा गांधी, बाबासाहेब आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, शहीद भगत सिंह और नेताजी सुभाष चंद्र बोस से प्रेरणा लेकर धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय के लिए लड़ेंगे।उधर सीजेपी ने अपने 2.2 करोड़ से ज्यादा के कम्युनिटी बेस से देश में बदलाव लाने के लिए सुझाव भी मांगे हैं। आने वाले दिनों में सबसे बेहतरीन आइडियाज को चुनकर देशव्यापी कैंपेन और जमीनी कार्रवाई की शुरुआत करने की बात की गई है। इस दौरान पार्टी का फोकस बेरोजगारी, पेपर लीक, पर्यावरण और सरकारी संस्थाओं की पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर होगा। इस बीच पेज को शुरू करने वाले अभिजीत दिपके को धमकियां मिलने के बाद उनके घर के बाहर पुलिस को तैनात कर दिया गया है। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में रहने वाले अभिजीत दिपके के माता-पिता के घर के बाहर अब 24 घंटे पुलिस मौजूद रहेगी। हालांकि अभिजीत खुद अमेरिका के बोस्टन में हैं। अभिजीत दिपके ने खुलासा किया है कि उन्हें और भारत में उनके परिवार को लगातार जान से मारने की धमकियां मिल नहीं रही हैं। उन्हें एक वीडियो भी मिला है जिसमें कुछ लोग उनके घर के बाहर खड़े दिख रहे हैं। यहां यह भी बता देंकि कुछ विपक्षी दल इस प्रकरण में सरकार के खिलाफ युवाओं का मोहभंग बगावत और बदलाव की बयार चलने की उम्मीद सजा रहे हैं लेकिन ध्यान रखना चाहिए कि सोशलमीडिया हैंडल ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के पास कोई राजनीतिक जमीन नहीं है,नेतृत्व नहीं है जबकि आम आदमी पार्टी राजनीतिक व्यवस्था को बदलने की जमीन तैयार करने के बाद अस्तित्व में आई थी। नेपाल में जेन-जी आंदोलन राजनीतिक रूप से खोखली हो चुकी व्यवस्था की पृष्ठभूमि में खड़ा हुआ था, जबकि बांग्लादेश में बदलाव की जमीन मुख्यतः मजहबी कट्टरता पर आधारित थी। बहरहाल सीजेपी का ऊफान कितने समय और कितना रफ्तार पकड़ेगा और क्या भारत सरकार और सत्तारूढ़ एनडीए के लिए कोई मुसीबत बनेगा यह नतीजा निकालना अभी जल्दबाजी होगा लेकिन इतना तय है कि इस सोशल मीडिया पर खड़े किए जा रहे तूफान को पाकिस्तान और खालिस्तानी समर्थक लोग जमकर टैग फोलो कर रहे हैं और इनकी बड़ी तादाद इस हवाई किले की बुनियाद में शामिल हो रही है आशंका यह भी है कि अमेरिका समेत कुछ विदेशी ताकतों द्वारा ऐसे अभियान को बैकडोर से हवा दी जा रही है वहीं विपक्ष भी मोदी के अश्वमेध यज्ञ को कमजोर करने के लिए ऐसे अभियान को साधन बनाने के लिए बेताब है। जाहिर है कि यह एक झोका है जो एक दो हफ्ते में कमजोर पड़ जाएगा और इस में राजनीतिक भविष्य तलाश रहे विपक्षी दलों की उम्मीदों पर भी पानी फिर जाएगा और मोदी फिर तंज कसेंगे तुमसे ना हो पाएगा! (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 38 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं ) ईएमएस / 26 मई 26