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26-May-2026
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24 घंटे में 12 धराए, बीएसएफ को सौंपने की तैयारी कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल की नवनिर्वाचित सरकार ने अपने चुनावी वादों के अनुरूप अवैध घुसपैठियों पर नकेल कसनी शुरू कर दी है। इसी सिलसिले में राज्य सरकार ने सोमवार को पहली बार दो नए होल्डिंग सेंटर यानी डिटेंशन कैंपों की शुरुआत की है। इन सेंटरों के खुलते ही महज 24 घंटों से भी कम समय में 12 बांग्लादेशी घुसपैठियों को हिरासत में लेकर यहां स्थानांतरित किया गया है। इनमें से नौ घुसपैठियों को मालदा जिले के इंग्लिश बाजार में बने पहले होल्डिंग सेंटर में रखा गया है, जबकि तीन अन्य को मुर्शिदाबाद जिले के लालगोला में बने डिटेंशन सेंटर में बंद किया गया है। राज्य सरकार ने घुसपैठियों के खिलाफ डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट अभियान का आधिकारिक ऐलान किया है। इसी विशेष प्रक्रिया के तहत पहचाने गए अवैध विदेशी नागरिकों को बांग्लादेश वापस भेजने से पहले अस्थायी रूप से सुरक्षित रखने के लिए ये होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं। राज्य के गृह विभाग ने हाल ही में सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश जारी किए थे कि विदेशी अधिनियम के तहत दर्ज बांग्लादेश और म्यांमार के अवैध प्रवासियों को अब सामान्य कैदियों के साथ नियमित जेलों में बिल्कुल न रखा जाए। इसके बजाय उनकी पहचान कर उन्हें अदालत के सामने पेश किया जाए और फिर निर्वासन तक सीधे सरकारी होल्डिंग सेंटरों में स्थानांतरित किया जाए। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इन नए डिटेंशन सेंटरों पर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए हैं। इनमें 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों से कड़ी निगरानी, पुलिस बल, सिविल डिफेंस कर्मियों और नागरिक स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। साथ ही यहां बंदियों के भोजन, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी जरूरतों का भी पूरा ख्याल रखा गया है। मालदा के चंदन पार्क स्थित सेंटर में वर्तमान में तीन महिलाओं और छह नाबालिगों सहित नौ लोग रह रहे हैं, जिन्हें गाजोल के पांडुआ इलाके से लाया गया है। वहीं मुर्शिदाबाद के रानीतला थाना क्षेत्र से हिरासत में लिए गए तीन संदिग्ध पुरुष भारत में रहने का कोई भी वैध दस्तावेज पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहे। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, मालदा और मुर्शिदाबाद सहित पूरे सीमावर्ती जिलों में अवैध नागरिकों के सत्यापन और पहचान की यह सघन प्रक्रिया आगे भी लगातार जारी रहेगी। कानूनी प्रक्रियाओं के तहत इन चिह्नित विदेशी नागरिकों को निर्वासन से जुड़ी अंतिम औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए जल्द ही सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को सौंप दिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय कानूनी समन्वय को आसान बनाने और उन्हें जल्द से जल्द वापस भेजने के लिए बीएसएफ और जिला पुलिस संयुक्त रूप से इन सभी बंदियों के बारे में विस्तृत जानकारी जुटा रही है। वीरेंद्र/ईएमएस/26मई 2026