ट्रेंडिंग
25-May-2026
...


नई दिल्ली (ईएमएस)। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का यह बयान कि अगले एक साल के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार गिर जाएगी, देश की राजनीति में नई बहस का कारण बन गया है। कांग्रेस की एक बैठक में दिए गए इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने राहुल गांधी के दावे को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक निराशा से जुड़ा बयान बताया है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों के बीच भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस दावे के पीछे कोई ठोस राजनीतिक आधार है या यह केवल विपक्षी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने की रणनीति है। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर नजर डालें तो केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार फिलहाल मजबूत स्थिति में दिखाई देती है। भारतीय जनता पार्टी भले ही अपने दम पर पूर्ण बहुमत के आंकड़े से कुछ दूर रही हो, लेकिन सहयोगी दलों के साथ उसका गठबंधन स्थिर माना जा रहा है। संसद में सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल है और फिलहाल किसी बड़े राजनीतिक संकट या गठबंधन टूटने जैसी स्थिति के संकेत नहीं दिख रहे हैं। हाल के विधानसभा चुनावों के नतीजों ने भी भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में माहौल मजबूत होने का संकेत दिया है। पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में पार्टी ने अपना प्रभाव बढ़ाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी अब केवल हिंदी भाषी राज्यों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भी उसकी पकड़ मजबूत हो रही है। इन चुनावी सफलताओं ने पार्टी नेतृत्व का आत्मविश्वास बढ़ाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता को भी सरकार की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है। विपक्ष लगातार महंगाई, बेरोजगारी, पेपर लीक और आर्थिक असंतोष जैसे मुद्दों को उठा रहा है, लेकिन इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर मोदी की लोकप्रियता में बड़ी गिरावट दिखाई नहीं दे रही। भाजपा अब भी चुनावी राजनीति में मोदी के चेहरे को सबसे प्रभावी मानती है और यही वजह है कि पार्टी लगातार जनसमर्थन बनाए रखने में सफल रही है। राहुल गांधी और कांग्रेस छात्रों, युवाओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। नीट परीक्षा विवाद और पेपर लीक जैसे मामलों को भी विपक्ष ने प्रमुखता से उठाया। हालांकि सरकार ने इन मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए परीक्षा रद्द करने जैसे कदम उठाए, जिससे विपक्ष को अपेक्षित राजनीतिक लाभ नहीं मिल सका। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय राजनीति में केवल जन असंतोष के आधार पर सरकारें नहीं गिरतीं। इसके लिए सत्ता पक्ष के भीतर गंभीर मतभेद, गठबंधन में टूट या व्यापक राजनीतिक संकट जैसी परिस्थितियां आवश्यक होती हैं, जो फिलहाल दिखाई नहीं दे रही हैं। दूसरी ओर विपक्षी गठबंधन की स्थिति भी पूरी तरह मजबूत नहीं मानी जा रही। विभिन्न क्षेत्रीय दल अपने-अपने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दे रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर अब तक कोई साझा नेतृत्व या स्पष्ट वैकल्पिक एजेंडा सामने नहीं आ पाया है। कई राज्यों में कांग्रेस संगठनात्मक रूप से भी कमजोर स्थिति में है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने राहुल गांधी के बयान को जनता के जनादेश को स्वीकार न कर पाने की मानसिकता बताया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राहुल गांधी का यह बयान अधिकतर राजनीतिक संदेश देने और पार्टी कार्यकर्ताओं में भरोसा बनाए रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए अगले एक वर्ष में केंद्र सरकार गिरने की संभावना फिलहाल बेहद कम नजर आती है। डेविड/ईएमएस 25 मई 2026