हैदराबाद,(ईएमएस)। असम विधानसभा में हिमंत बिस्वा सरमा सरकार द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) विधेयक पेश होने के बाद एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने यूसीसी कानून को मुसलमानों पर बैकडोर से हिंदू कानून थोपने का प्रयास बताया। असम, गुजरात, गोवा और उत्तराखंड के बाद चौथा भाजपा शासित राज्य बन गया है, जहां समान नागरिक संहिता अपनाने की प्रक्रिया शुरू की है। एआईएमआईएम सांसद ओवैसी ने आरोप लगाया कि यह विधेयक मुस्लिम पर्सनल कानूनों पर सीधा हमला और उनके संवैधानिक अधिकारों का अतिक्रमण करता है। उन्होंने लिखा कि उत्तराधिकार, विरासत और तलाक जैसे महत्वपूर्ण मामलों में हिंदू सिद्धांतों को जबरन थोपा जा रहा है, जिसका उद्देश्य सिर्फ हिंदू संस्कृति को संरक्षित करना है, जबकि मुसलमानों को इन कथित समान कानूनों को मानने के लिए मजबूर किया। हैदराबाद के सांसद ने असम के यूसीसी को असमान बताकर इसकी आलोचना की, क्योंकि इसमें आदिवासी समुदाय को इसके दायरे से पूरी तरह बाहर किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि जब संविधान का अनुच्छेद 29 सभी समुदायों को अपनी संस्कृति की रक्षा का अधिकार देता है, तब केवल आदिवासियों की स्वायत्तता ही क्यों बचाया जा रहा है? ओवैसी के अनुसार, यह ऐसा कानून थोपने की कोशिश है जिसकी किसी को जरूरत नहीं, और संविधान सभा ने भी यूसीसी की अनिवार्यता को जरूरी नहीं समझा था। उन्होंने इस्लाम में विरासत के सिद्धांतों (कोई वारिस वंचित नहीं हो सकता, बेटियों को उचित हिस्सा मिलना) का जिक्र कर कहा कि यह यूसीसी बेटियों को वसीयत के जरिए उनके वाजिब हक से वंचित करने की इजाजत देता है, और इसका लैंगिक न्याय से कोई संबंध नहीं है। असम सरकार के विधेयक के कानून बनने पर, बहुविवाह और दो विवाह सभी धर्मों के लिए गैर-कानूनी हो जाएंगे। इसमें महिलाओं को विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के मामलों में समान अधिकार और कानूनी सुरक्षा मिलेगी। यह राज्य में विभिन्न धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों की जगह लेगा, हालांकि अनुसूचित जनजातियों को इससे छूट दी गई है। विधेयक लड़कों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 21 और लड़कियों के लिए 18 साल निर्धारित करता है। सभी शादियों और तलाक का 60 दिनों के भीतर पंजीकरण अनिवार्य होगा। इसके पहले असम विधानसभा में महत्वपूर्ण बहस के बीच, मुख्यमंत्री सरमा ने प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक का जोरदार बचाव किया। उन्होंने यूसीसी को अल्पसंख्यक समुदायों की महिलाओं को अधिकतम सुरक्षा और न्याय देने वाला प्रगतिशील कदम बताया, विपक्ष पर मुद्दे पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। सीएम सरमा ने स्पष्ट किया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दे रही है, और यह विधेयक धार्मिक अल्पसंख्यक महिलाओं के विवाह, उत्तराधिकार और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित अधिकारों को मजबूत करेगा। इस विधेयक को सोमवार को संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने मुख्यमंत्री की ओर से पेश किया था और इस पर 27 मई को चर्चा तथा पारित होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री सरमा ने राज्य की आर्थिक प्रगति पर भी प्रकाश डाला, यह घोषणा करते हुए कि असम 2028 तक 10 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। उन्होंने बताया कि राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 2021-22 में 4 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वर्तमान में अनुमानित 8.72 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो 13 से 15 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाता है। इस अभूतपूर्व गति के साथ, असम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के विजन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वित्त मंत्रालय ने भी इस बात की पुष्टि की है कि असम को 2014 से 2026 तक कर हस्तांतरण और केंद्रीय अनुदान के रूप में 5.61 लाख करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इसके अतिरिक्त, टिकाऊ अवसंरचना के विकास के लिए पूंजीगत व्यय हेतु 17,000 करोड़ रुपये से अधिक का ब्याज-मुक्त ऋण भी प्रदान किया गया है। आशीष दुबे / 26 मई 2026