क्षेत्रीय
27-May-2026


० ’सफलता से प्रभावित होकर खुद घर पहुंचे कलेक्टर, थपथपाई पीठ’ रायपुर (ईएमएस)। अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो शारीरिक अक्षमता भी आपके कदमों को नहीं रोक सकती। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है धमतरी जिला के विकासखंड धमतरी के ग्राम पीपरछेड़ी के रहने वाले जांबाज छात्र नागेश देशमुख ने। नागेश ने अपनी शारीरिक दिव्यांगता को कभी अपनी पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया, लेकिन उनका यह सफर आसान नहीं था। अब शासन की एक संवेदनशील पहल ने उनके इस कठिन सफर को ट्राइसाइकिल ने न सिर्फ आसान बना दिया है, बल्कि उनके सपनों को नई उड़ान भी दे दी है। नागेश बचपन से ही पढ़ाई के प्रति बेहद गंभीर और समर्पित रहे हैं। सीमित संसाधनों और रोजमर्रा की शारीरिक दिक्कतों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। स्कूल आने-जाने के लिए उन्हें हर दिन एक नए संघर्ष से गुजरना पड़ता था। कभी परिवार के सदस्यों की मदद का इंतजार करना पड़ता, तो कभी खुद ही कष्ट सहकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। इस दर्द और थकान के बाद भी उनका हौसला नहीं डिगा और उन्होंने कड़ी मेहनत के दम पर 11वीं की परीक्षा सम्मानजनक अंकों के साथ उत्तीर्ण की। नागेश की जिंदगी में असली बदलाव आया 21 मई को, जब ग्राम पीपरछेड़ी में सुशासन तिहार के अंतर्गत समाधान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में नागेश की तकलीफ को समझते हुए प्रशासन द्वारा त्वरित कदम उठाया गया। राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा के हाथों जब नागेश को चमचमाती ट्राइसाइकिल मिली, तो उनकी आँखें खुशी से छलक उठीं। यह ट्राइसाइकिल सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि नागेश के लिए आत्मनिर्भरता और स्वाभिमान का एक नया दस्तावेज थी। नागेश देशमुख ने कहा कि पहले मुझे कहीं भी आने-जाने में बहुत परेशानी होती थी और हमेशा दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन अब यह ट्राइसाइकिल मिलने से मेरा सफर सुरक्षित और आसान हो गया है। अब मैं बिना किसी रुकावट के और बिना किसी भी व्यक्ति के सहारे स्वयं अपनी आगे की पढ़ाई पूरी कर सकूँगा। ट्राइसाइकिल मिलने के बाद नागेश का स्कूल और समाज के बीच का सफर बेहद सहज हो गया है। अब वे अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए किसी और पर आश्रित नहीं हैं। इस मदद ने उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास फूंक दिया है, जिससे वे अब अपने भविष्य को संवारने की तैयारी में जुट गए हैं। यह कहानी सिर्फ नागेश की सफलता की नहीं है, बल्कि यह राज्य शासन और जिला प्रशासन की उस संवेदनशीलता को भी दर्शाती है, जो अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचा रही है। श्सुशासन तिहारश् के माध्यम से आयोजित ये समाधान शिविर आम नागरिकों की समस्याओं का मौके पर ही निपटारा कर रहे हैं। नागेश जैसी सफलता की कहानियाँ यह साबित करती हैं कि जब जनहितकारी योजनाएँ सही हाथों तक पहुँचती हैं, तो समाज में समानता और सम्मान की एक नई सुबह की शुरुआत होती है। सत्यप्रकाश/चंद्राकर/27 मई 2026