क्षेत्रीय
27-May-2026
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- आईडीए और प्रशासनिक जनसुनवाई में सौंपे ज्ञापन, अमलतास का दिया विकल्प; नीतिगत संकट की आशंका इंदौर (ईएमएस)। इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) द्वारा गुलमोहर कॉम्प्लेक्स में विस्थापितों को पुनर्वासित करने के निर्णय के खिलाफ स्थानीय रहवासियों ने लामबंद होकर मोर्चा खोल दिया है। सोमवार और मंगलवार को भारी संख्या में आईडीए कार्यालय और प्रशासनिक जनसुनवाई में पहुंचे रहवासियों ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) परीक्षित झाड़े व संभागायुक्त सुदामा खाडे को ज्ञापन सौंपा। रहवासियों ने साफ लहजे में चेतावनी दी है कि यदि प्राधिकरण ने इस मनमाने निर्णय को वापस नहीं लिया, तो वे चरणबद्ध तरीके से भूख हड़ताल और पुतला दहन जैसे उग्र प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। रहवासी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार एलआईजी श्रेणी के गुलमोहर कॉम्प्लेक्स के कुल 334 फ्लैट्स में से केवल 90 फ्लैट खाली हैं, जिनका क्षेत्रफल 667 वर्ग फीट है। इसके विपरीत, विस्थापित होने वाले परिवारों की संख्या 200 से अधिक है। ऐसे में सभी परिवारों को यहाँ समायोजित करना व्यावहारिक रूप से असंभव है, जिससे भविष्य में बड़ा कानूनी विवाद खड़ा होना तय है। रहवासियों ने इस समस्या का व्यावहारिक विकल्प सुझाते हुए कहा कि पास ही नवनिर्मित अमलतास कॉम्प्लेक्स में 450 फ्लैट्स रिक्त पड़े हैं, जो 550 वर्ग फीट आकार के हैं। पूरी तरह नई और खाली पड़ी यह बहुमंजिला इमारत पुनर्वास के लिए हर लिहाज से उपयुक्त है, जिस पर सीईओ ने गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया है। - बुनियादी सुविधाओं और रखरखाव पर उठे सवाल रहवासियों ने आईडीए पर पूर्व में किए गए निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी आरोप लगाए। उनका कहना है कि कॉम्प्लेक्स में वर्तमान में ही पानी की भीषण किल्लत है और लिफ्ट अक्सर बंद रहती है। प्राधिकरण अपने न बिकने वाले फ्लैट्स विस्थापितों को देकर जिम्मेदारी से पीछा छुड़ाना चाहता है। इसके अतिरिक्त, विस्थापित परिवारों से हर महीने 1500 से 2000 रुपये का मेंटेनेंस शुल्क वसूलने और पानी की सुचारू आपूर्ति बढ़ाने की गारंटी लेने को भी प्राधिकरण तैयार नहीं दिखाई दे रहा है। - राजनैतिक दबाव और नीतिगत संकट सूत्रों के अनुसार, आगामी सिंहस्थ महाकुंभ-2028 के मद्देनजर एमआर-11 और एमआर-12 रोड के निर्माण के लिए क्षेत्रीय विधायक व कैबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट के राजनैतिक दबाव में यह कार्रवाई की जा रही है। आरोप लग रहे हैं कि मंत्री अपने समर्थकों को एलआईजी श्रेणी के बड़े फ्लैट दिलवाने के लिए आईडीए पर दबाव बना रहे हैं। इस मामले में प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि अब तक विस्थापितों को केवल ईडब्ल्यूएस श्रेणी के मकान ही दिए जाने का नियम रहा है। यदि गुलमोहर कॉम्प्लेक्स (एलआईजी श्रेणी) में इन्हें बसाया गया, तो यह पूरे प्रदेश के लिए एक ऐसी नई परिपाटी बन जाएगी जिससे भविष्य में राज्य भर के विस्थापित बड़े फ्लैटों की मांग करने लगेंगे। यह नई नजीर आगे चलकर राज्य सरकार के लिए एक बड़ा नीतिगत और खजाने पर वित्तीय संकट खड़ा कर सकती है। प्रकाश/27 मई 2026