लेख
28-May-2026
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- कांगो से आए युवक में संक्रमण की आशंका से स्वास्थ्य तंत्र अलर्ट गुजरात में इबोला वायरस की आशंका ने स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अफ्रीकी देश कांगो से लौटे एक 37 वर्षीय युवक में इबोला जैसे लक्षण पाए जाने के बाद पूरे राज्य का स्वास्थ्य तंत्र अलर्ट मोड पर आ गया है। युवक को पहले वडोदरा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन हालत और लक्षणों को देखते हुए बाद में अहमदाबाद सिविल अस्पताल में विशेष निगरानी के तहत भर्ती किया गया। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संपर्क ट्रेसिंग और निगरानी की प्रक्रिया तेज कर दी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार मरीज करीब दस दिन पहले कांगो से मुंबई पहुंचा था। मुंबई में कुछ दिन रुकने के बाद वह सिलवासा और दमण क्षेत्र गया तथा बाद में 22 मई को वडोदरा पहुंचा। 26 मई को उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। लगातार बुखार और वायरल हेमरेजिक फीवर जैसे लक्षण सामने आने पर डॉक्टरों ने उसे संदिग्ध इबोला मरीज मानते हुए विशेष निगरानी में रखा। मरीज की जांच रिपोर्ट में लीवर एंजाइम्स एसजीपीटी और एसजीओटी का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया। इसके अलावा प्लेटलेट्स भी सामान्य से कम दर्ज किए गए, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता और बढ़ गई। इबोला वायरस दुनिया के सबसे खतरनाक संक्रमणों में गिना जाता है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है और तेजी से गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है। अफ्रीकी देशों में समय-समय पर इसके प्रकोप की खबरें आती रही हैं। यही कारण है कि कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान जैसे देशों से आने वाले यात्रियों की विशेष जांच की जा रही है। गुजरात सरकार ने अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विशेष स्क्रीनिंग की व्यवस्था भी की है ताकि किसी भी संभावित संक्रमित व्यक्ति की समय रहते पहचान की जा सके। अहमदाबाद सिविल अस्पताल में मरीज को आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उसकी निगरानी कर रही है। अस्पताल प्रशासन ने संक्रमण से बचाव के लिए विशेष प्रोटोकॉल लागू किए हैं। स्वास्थ्य कर्मियों को पीपीई किट और अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं ताकि संक्रमण फैलने का खतरा कम किया जा सके। मरीज की अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक उसे पूरी तरह अलग निगरानी में रखा जाएगा। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि सरकार पूरी तरह सतर्क है और किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। उन्होंने बताया कि मरीज के संपर्क में आए सभी लोगों की पहचान की जा रही है। संपर्क में आए लोगों में कुछ को बुखार की शिकायत भी मिली है, इसलिए उनकी मेडिकल जांच और निगरानी शुरू कर दी गई है। एक चिकित्सक और कुछ विदेशी नागरिकों के संपर्क में आने की जानकारी भी सामने आई है। इन सभी लोगों को स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में रखा गया है। अहमदाबाद मनपा संचालित एसवीपी अस्पताल में भी तीन संदिग्ध मरीजों को क्वारंटीन किया गया है। अस्पताल प्रशासन ने विशेष वार्ड तैयार कर रखा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इलाज शुरू किया जा सके। डॉक्टरों का कहना है कि अभी घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी और सतर्कता बेहद जरूरी है। संक्रमण की पुष्टि होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। इबोला जैसी बीमारियां केवल स्वास्थ्य संकट ही नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक चुनौती भी बन जाती हैं। कोविड महामारी के बाद लोगों में संक्रामक रोगों को लेकर संवेदनशीलता बढ़ी है। ऐसे में किसी भी संदिग्ध मामले की खबर तेजी से चिंता का कारण बन जाती है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते जांच और निगरानी से संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग ने एयरपोर्ट स्क्रीनिंग, अस्पताल निगरानी और संपर्क ट्रेसिंग जैसे कदम तेजी से शुरू किए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इबोला संक्रमण के शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, कमजोरी, शरीर में दर्द, उल्टी और रक्तस्राव जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। यदि समय पर इलाज और आइसोलेशन न किया जाए तो यह वायरस गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए विदेश यात्रा से लौटने वाले लोगों को किसी भी असामान्य लक्षण की स्थिति में तुरंत जांच करानी चाहिए और स्वास्थ्य विभाग को जानकारी देनी चाहिए। गुजरात सरकार की सक्रियता इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग लगातार अस्पतालों को दिशा निर्देश जारी कर रहा है। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित संक्रमण से प्रभावी तरीके से निपटा जा सके। एयरपोर्ट और अस्पतालों में निगरानी बढ़ा दी गई है तथा मेडिकल टीमों को अलर्ट रखा गया है। यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि वैश्विक स्तर पर फैलने वाली बीमारियों का खतरा आज भी बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय यात्रा और बढ़ती आवाजाही के कारण किसी भी देश में संक्रमण पहुंचने की संभावना बनी रहती है। ऐसे समय में मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और त्वरित कार्रवाई ही सबसे बड़ा बचाव साबित होती है। फिलहाल पूरे राज्य की नजर मरीज की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। स्वास्थ्य विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अफवाहों से बचने की अपील कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर किसी भी संभावित खतरे से प्रभावी तरीके से निपटा जा सकता है। (L 103 जलवन्त टाउनशिप पूणा बॉम्बे मार्केट रोड, नियर नन्दालय हवेली सूरत मो 99749 40324 वरिष्ठ पत्रकार, साहित्यकार-स्तम्भकार) ईएमएस / 28 मई 26