ट्रंप से अलग से मुलाकात को लेकर संशय नई दिल्ली (ईएमएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले माह फ्रांस और स्लोवाकिया के महत्वपूर्ण दौरे पर जा रहे हैं, जो भारत और यूरोप के बीच बढ़ते रणनीतिक व कारोबारी रिश्तों को नई ऊंचाई देगा। अपने इस अहम दौरे के दौरान वे फ्रांस में होने वाले 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन में दुनिया के शीर्ष नेताओं के साथ वैश्विक मुद्दों पर गहन मंथन करने वाले है। वहीं स्लोवाकिया की अपनी यात्रा के साथ एक नया इतिहास भी रचने वाले है। रिपोर्ट के अनुसार, पीएम मोदी 15 से 17 जून तक फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विशेष निमंत्रण पर एवियां-ले-बां शहर में आयोजित 52वें जी7 शिखर सम्मेलन में आउटरीच पार्टनर के रूप में शामिल हो रहे है। यह पांचवीं बार होगा जब पीएम मोदी जी7 समिट का हिस्सा बन रहे है। जिसकी शुरुआत फ्रांस ने ही की थी। अपनी इस यात्रा के दौरान वे नीस और पेरिस का दौरा करने वाले हैं, जहां प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के नेता महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने वाले है। जी-7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी हिस्सा ले रहे है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि पीएम मोदी और ट्रंप के बीच कोई अलग से द्विपक्षीय वार्ता होगी या नहीं। दोनों नेताओं के बीच आखिरी आमने-सामने की मुलाकात फरवरी 2025 में हुई थी, जिसके बाद मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान मध्यस्थता को लेकर ट्रंप के दावों, टैरिफ लगाने और भारत पर की गई उनकी विवादास्पद टिप्पणी (हेलहोल) के कारण संबंधों में थोड़ी खटास आई थी। हालांकि, व्यापारिक समझौतों पर बातचीत के बाद फिलहाल ये टैरिफ हटाए गए हैं। हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के भारत दौरे से क्रिटिकल मिनरल डील के अलावा कोई खास नतीजा नहीं निकला था, हालांकि उन्होंने भारतीयों के खिलाफ नस्लवाद के आरोपों को खारिज किया। अपने प्रमुख दौरे में फ्रांस के बाद प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया का द्विपक्षीय दौरा करने वाले है। जो 1993 में राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा होगी। यह दौरा फरवरी में स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी की भारत यात्रा के बाद आया है, जब इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान दोनों नेताओं के बीच विस्तृत बातचीत हुई थी, जिससे द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक माहौल बना है। भारत और स्लोवाकिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़कर 1.3 अरब यूरो के पार पहुंच गया है। स्लोवाकिया, मजबूत विनिर्माण क्षमता वाला यूरोपीय संघ का सदस्य देश है, जो भारत के विशाल बाजार और नवाचार इकोसिस्टम के साथ साझेदारी में गहरा मूल्य देखता है। दोनों देश अब इंडस्ट्री 4.0, डिजिटल परिवर्तन और स्टार्टअप्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री इस आर्थिक सहयोग का एक मजबूत आधार है। यूरोप के डेट्रॉइट के नाम से मशहूर स्लोवाकिया हर साल लगभग 10 लाख कारों का उत्पादन करता है और प्रति व्यक्ति कार उत्पादन में दुनिया में अग्रणी है। यहां फॉक्सवैगन, किआ और स्टेलेंटिस जैसी वैश्विक कंपनियों के अलावा भारतीय कंपनी टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाली जगुआर लैंड रोवर (जेएलआर) का 1.4 अरब यूरो का अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग प्लांट भी स्लोवाकिया के निट्रा में स्थित है, जो 2018 से लैंड रोवर डिफेंडर और डिस्कवरी गाड़ियां वैश्विक बाजार के लिए बनाता है। यह स्लोवाकिया में सबसे बड़े भारतीय निवेशों में से एक है। आशीष दुबे / 28 मई 2026