ग्वालियर ( ईएमएस ) । माननीय उच्च न्यायालय द्वारा मुरार नदी पीआईएल की सुनवाई में दिए गए निर्देश के परिपालन में मुरार नदी के कायाकल्प और जीर्णोद्धार कार्य को गति देने के लिए बाल भवन के टीएलसी कक्ष में न्यायालय द्वारा गठित दल के सदस्यों द्वारा महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कार्य की प्रगति की समीक्षा करने के साथ ही आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए रणनीति बनाई गई। बैठक में नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय, अतिरिक्त महाधिवक्ता अंकुर मोदी, रिटायर्ड जिला न्यायाधीश ए. पी.तोमर, एडीएम सीबी प्रसाद, अपर आयुक्त प्रदीप तोमर,रिटार्यड नोडल अधिकारी विधि अनूप लिटोरिया, प्रोजेक्ट इंजीनियर, वरिष्ठ वकील और संबंधित ठेकेदार एवं टीम के अन्य सदस्य मुख्य रूप से उपस्थित रहे। बैठक में जानकारी दी गई कि मुरार नदी के जीर्णोद्धार प्रोजेक्ट के तहत रामऊआ डैम से लेकर जड़ेरुआ तक नदी के किनारे पाथवे (पैदल मार्ग), फेंसिंग और कर्व स्टोन लगाने जैसे सौंदर्यीकरण के कार्य किए जाने हैं। अधिकारियों ने अब तक हुए कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि नदी किनारे कई स्थानों पर पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण काम प्रभावित हो रहा है। विशेषकर संतर ब्रिज से काल्पी ब्रिज तक कई स्थानों पर केवल 7 से 8 मीटर जगह ही मिल पा रही है। इस समस्या को देखते हुए निगमायुक्त श्री संघ प्रिय ने निर्देश दिए कि जहाँ चौड़ाई कम है, वहाँ ड्रोन से सर्वे कराया जाए। साथ ही वर्तमान नक्शा निकालकर उस पर मार्किंग की जाए कि कहाँ-कहाँ कितनी जगह उपलब्ध है, ताकि वैकल्पिक कार्यों की योजना बनाई जा सके। इसके साथ ही नदी क्षेत्र में हुए अतिक्रमण को लेकर बैठक में चर्चा की गई। जिसमें बताया गया कि नदी के 50 मीटर के दायरे में निजी भूमि पर 265 निजी संपत्तियां बनी हुई हैं। साथ ही शासकीय जमीन पर 37 संपत्तियां पाई गई हैं। नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए निगमायुक्त ने नदी में मिल रहे सभी नालों पर जाली लगाने के निर्देश दिए हैं, ताकि कचरा नदी में न जा सके। इसके साथ ही उन्होंने जीर्णोद्धार के लिए एक ठोस एक्शन प्लान तैयार करने को कहा है। ठेकेदार को सख्त हिदायत दी गई है कि जिन स्थानों पर पर्याप्त जगह उपलब्ध है, वहाँ बिना किसी देरी के कार्य को शीघ्रता से पूर्ण किया जाए। आगामी समीक्षा बैठक 11 जून को आयोजित होगी।