व्यापार
28-May-2026


3 महीने में भारतीयों के शेयर बाजार में डूब गए 13 लाख करोड़ मुंबई(ईएमएस)। भारतीय शेयर बाजार में आई बड़ी गिरावट के कारण मार्च तिमाही में देश के निवेशकों की इक्विटी संपत्ति में करीब 12.6 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की ताजा मार्केट प्लस रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के वर्षों में यह भारतीय शेयर बाजार की सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली तिमाहियों में से एक रही। चौथी तिमाही में निफ्टी 50 में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ईरान संघर्ष को लेकर चिंता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली रही। इसके अलावा वैश्विक निवेशकों का रुझान एआई और सेमीकंडक्टर सेक्टर की ओर बढ़ा, जिससे पैसा भारत जैसे उभरते बाजारों से निकलकर ताईवान और साउथ कोरिया जैसे देशों की तरफ जाने लगा। 76.5 लाख करोड़ पर पहुंची घरेलू इक्विटी रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2026 तक एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों में घरेलू निवेशकों की कुल हिस्सेदारी, जिसमें सीधे शेयर निवेश और म्यूचुअल फंड निवेश दोनों शामिल हैं, घटकर 76.5 लाख करोड़ रुपये रह गई। यह तिमाही आधार पर करीब 13 फीसदी की गिरावट है। वित्तीय वर्ष 26 के दौरान कुल 2.5 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन अकेले मार्च तिमाही में ही 12.6 लाख करोड़ रुपये की बड़ी गिरावट देखने को मिली। हालांकि अप्रैल 2020 से अब तक घरेलू निवेशकों की कुल इक्विटी संपत्ति में करीब 44 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी अब भी बनी हुई है। विदेशी निवेशकों ने निकाला भारी पैसा रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय वर्ष 26 के दौरान विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से 19.6 अरब डॉलर निकाल लिए। इसका असर उनकी हिस्सेदारी पर भी पड़ा। एनएसई में सूचीबद्ध कंपनियों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी घटकर 17 साल के निचले स्तर 15.8 फीसदी पर पहुंच गई। वहीं निफ्टी 50 में उनकी हिस्सेदारी भी घटकर 21.8 फीसदी रह गई। म्यूचुअल फंड में निवेश बना मजबूत बाजार गिरने के बावजूद घरेलू म्यूचुअल फंड निवेश लगातार मजबूत बना रहा। एसआईपी के जरिए निवेश जारी रहने से म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी बढक़र रिकॉर्ड 11.4 फीसदी पर पहुंच गई। यह लगातार 11वीं तिमाही है जब म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी रिकॉर्ड स्तर पर रही। सीधे शेयर खरीदने से दूर हो रहे निवेशक रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि खुद शेयर खरीदने वाले व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी लगातार दूसरी तिमाही में घटकर 5 साल के निचले स्तर 9.1 फीसदी पर पहुंच गई। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि छोटे निवेशक बाजार छोड़ रहे हैं। अब लोग सीधे शेयर खरीदने की बजाय म्यूचुअल फंड और एसआईपी के जरिए निवेश करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय निवेशकों की सोच अब धीरे-धीरे लंबी अवधि और व्यवस्थित निवेश की तरफ बढ़ रही है। विनोद उपाध्याय / 28 मई, 2026