नई दिल्ली (ईएमएस)। खड़ी कार अगर पूरी तरह से बंद है तो उसके भीतर किसी को नहीं बैठना चाहिए। खासकर बच्चों को तो ऐसे कार के अंदर छोडना ही नहीं चाहिए। अगर बच्चों को कार में छोड़ना ही पड़े तो उसका कांच लगभग आधा खोलकर रखें। जब भीषण गर्मी का दिन हो तब तो ऐसी भूल बच्चों के लिए जानलेवा हो सकती है। कई बार लोग यह सोचकर बच्चों को कुछ मिनटों के लिए कार में अकेला छोड़ देते हैं कि इससे कोई खतरा नहीं होगा लेकिन, यही छोटी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। एक्सपर्ट के अनुसार धूप में खड़ी बंद कार महज 10 से 15 मिनट के भीतर ही हीट चैंबर में बदल जाती है। कार के अंदर तापमान बाहर की तुलना में कई गुना ज्यादा हो जाता है। ऐसे माहौल में बच्चों का शरीर तेजी से गर्म होता है और वे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन या दम घुटने जैसी गंभीर स्थिति का शिकार हो सकते हैं। इसके पीछे के कारण बताते हुए एक्सपर्ट ने बताया कि कार के शीशे सूरज की किरणों को अंदर आने देते हैं लेकिन, गर्मी को बाहर निकलने नहीं देते। इसे ग्रीनहाउस इफेक्ट कहा जाता है। जब कार धूप में खड़ी रहती है, तो सूरज की गर्म किरणें शीशों के जरिए आसानी से अंदर पहुंच जाती हैं। इसके बाद कार की सीट, डैशबोर्ड और अन्य हिस्से गर्म होकर हीट पैदा करने लगते हैं। बंद शीशों और दरवाजों की वजह से यह गर्मी बाहर नहीं निकल पाती। नतीजा यह होता है कि कार के अंदर लगातार तापमान बढ़ता जाता है और कुछ ही देर में अंदर का माहौल बाहर की तुलना में कई गुना ज्यादा गर्म हो जाता है। अगर बाहर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस है तो तो कार के अंदर का तापमान कुछ ही मिनटों में 50 से 60 डिग्री तक पहुंच सकता है। एक्सपर्ट के अनुसार बच्चों के लिहाज से यह सबसे अधिक खतरनाक इसीलिए हो जाता है क्योंकि छोटे बच्चों में शरीर को ठंडा रखने की क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती। ऐसे में कार के भीतर गर्मी बढ़ने पर उनका शरीर जल्दी प्रतिक्रिया देने लगता है। बच्चे इस गर्मी को झेल नहीं पाते हैं। शुरुआत में पसीना आना, बेचैनी, तेज सांस चलना और चक्कर जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। स्थिति गंभीर होने पर बच्चा बेहोश भी हो सकता है और समय पर मदद नहीं मिलने पर जान जाने का खतरा भी रहता है। इसलिए बच्चों या पालतू जानवरों को कभी भी बंद कार में अकेला न छोड़ें, चाहे समय कुछ मिनटों का ही क्यों न हो। एक्सपर्ट के अनुसार गर्मी के दिनों में कुछ सावधानियां अपनाकर कार के अंदर बढ़ने वाले तापमान से काफी हद तक बचा जा सकता है। सबसे जरूरी है कि कार को हमेशा पेड़ की छांव या ऐसी जगह पार्क करें, जहां सीधी धूप कम पड़ती हो। अगर मजबूरी में धूप में गाड़ी खड़ा करना पड़े, तो शीशों को थोड़ा सा खुला छोड़ सकते हैं, ताकि अंदर की गर्म हवा बाहर निकलती रहे। हालांकि, इससे कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। इसके अलावा कार स्टार्ट करने से पहले कुछ देर के लिए सभी शीशे खोल देना चाहिए ताकि अंदर जमा गर्म हवा बाहर निकल जाए। कई लोग कार के शीशों पर विशेष सन-फिल्म या हीट प्रोटेक्शन फिल्म भी लगवाते हैं। ये सूरज की गर्म किरणों को काफी हद तक रोकने में मदद करती है। अगर संभव हो तो हल्के रंग की कार चुनना भी बेहतर होता है, क्योंकि गहरे रंग की गाड़ियां ज्यादा गर्मी सोखती हैं। सुदामा/ईएमएस 29 मई 2026