नई दिल्ली (ईएमएस)। कर्नाटक सरकार ने इबोला वायरस के संक्रमण की आशंका को देखते हुए निगरानी और स्वास्थ्य तैयारियों को और मजबूत करना शुरू कर दिया है। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में तेजी से फैल रहे संक्रमण के मद्देनजर भारत में भी एहतियाती कदम तेज कर दिए गए हैं। बेंगलुरु और मंगलुरु में विशेष केंद्र तैयार किए गए हैं ताकि किसी भी संदिग्ध स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बेंगलुरु स्थित राजीव गांधी चेस्ट डिजीज इंस्टीट्यूट को आइसोलेशन सेंटर के रूप में विकसित किया गया है। यहां इबोला के कुछ संदिग्ध मामलों के सामने आने के बाद निगरानी बढ़ा दी गई है। संदिग्ध मरीजों के नमूनों की जांच पहले एनआईवी बेंगलुरु में की जाएगी और उसके बाद पुष्टि के लिए एनआईवी पुणे भेजा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि फिलहाल भारत में इबोला संक्रमण का कोई भी पुष्ट मामला सामने नहीं आया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्राओं और व्यापारिक गतिविधियों को देखते हुए सरकार पूरी सतर्कता बरत रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक इबोला एक बेहद गंभीर और जानलेवा वायरल बीमारी है, जिसे इबोला वायरस डिजीज के नाम से भी जाना जाता है। यह संक्रमण संक्रमित व्यक्ति या जानवर के खून, अंगों और शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। संक्रमित कपड़े, बिस्तर, सुई और अन्य वस्तुएं भी संक्रमण फैलाने का माध्यम बन सकती हैं। स्वास्थ्यकर्मियों और संक्रमित मरीजों के करीबी लोगों को सबसे ज्यादा खतरा रहता है। इबोला के लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के दो से इक्कीस दिनों के भीतर दिखाई देने लगते हैं। शुरुआती लक्षणों में तेज बुखार, कमजोरी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश शामिल हैं। इसके बाद मरीज को उल्टी, दस्त, पेट दर्द, आंखों का लाल होना और शरीर पर लाल चकत्ते जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव भी हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को घबराने के बजाय सतर्क रहने की सलाह दी है। संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखने, हाथों को नियमित रूप से साफ करने, मास्क और ग्लव्स का उपयोग करने तथा संक्रमित क्षेत्रों की यात्रा से बचने की अपील की गई है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर जांच, इलाज और आइसोलेशन से संक्रमण को फैलने से काफी हद तक रोका जा सकता है। बता दें कि विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इबोला वायरस के बढ़ते खतरे को लेकर वैश्विक स्वास्थ्य आपातस्थिति घोषित किए जाने के बाद भारत में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। सुदामा/ईएमएस 29 मई 2026