नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति को लेकर कूटनीतिक स्तर पर एक और कदम उठाया गया है। बीजिंग में हुई वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोआर्डिनेशन (डल्ब्यूएमसीरसी) की अहम बैठक के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने बातचीत को बेहद रचनात्मक और दूरदर्शी बताया। दोनों पक्षों ने एकमत होकर इस बात पर जोर दिया कि सीमा पर शांति और स्थिरता ही समग्र संबंधों को सामान्य बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। साल 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों एशियाई देशों के संबंध बेहद तनावपूर्ण बने हुए थे। चार साल तक चले सैन्य गतिरोध के बाद, अब दोनों राष्ट्र आपसी संबंधों को पुनः पटरी पर लाने के लिए प्रयासरत हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की और सीमा पर शांति बनाए रखने की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष जाहिर किया। उनका मानना है कि इसी प्रगति ने द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने में मदद की है। बीजिंग में हुई इस बैठक में परिसीमन, सीमा प्रबंधन, नए तंत्रों के विकास और सीमा-पार सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। भारत ने सीमा पार बहने वाली नदियों पर अगली विशेषज्ञ-स्तरीय बैठक जल्द बुलाने पर जोर दिया। दोनों देश 24वीं विशेष प्रतिनिधि (एसआर) वार्ता के तहत बनी सहमतियों के आधार पर कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर नियमित संपर्क बनाए रखने पर सहमत हुए। इस कूटनीतिक चर्चा में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) सुजीत घोष ने किया, जबकि चीनी दल की कमान वहां के विदेश मंत्रालय के सीमा और महासागरीय मामलों के विभाग की महानिदेशक हाओ यानकी ने संभाली। श्री घोष ने चीनी विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की, जिनमें सहायक विदेश मंत्री होंग लेई शामिल थे। बैठक में दोनों देशों ने चीन में होने वाली अगली विशेष प्रतिनिधियों (एसआर) की बैठक के लिए ठोस तैयारी करने पर भी सहमति जाहिर की है। यह वार्ता तब हुई है जब दोनों देश तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। कई दौर की कूटनीतिक और सैन्य वार्ताओं के बाद, पूर्वी लद्दाख में एलएसी के कई टकराव बिंदुओं से सैनिकों को पीछे हटाया गया है, जिसमें डेपसांग और डेमचोक जैसे अहम क्षेत्र भी शामिल हैं। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कजान व शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर मुलाकातें की थीं, जिसमें रिश्तों को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया था कि भारत आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। आशीष/ईएमएस 29 मई 2026