कुछ महीनों की कुर्सी, लेकिन भविष्य की बड़ी तैयारी जबलपुर (ईएमएस)। नगर पालिक निगम जबलपुर में शहर सरकार का कार्यकाल भले ही अंतिम दौर में पहुंच चुका हो, लेकिन सत्ता और संगठन के गलियारों में राजनीतिक हलचल अचानक तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की हाल ही में संपन्न हुई प्रबंध समिति की बैठक के बाद नगर निगम की राजनीति में ऐसा उबाल आया है, जिसने पार्षदों से लेकर संगठन के नेताओं तक को सक्रिय कर दिया है। चर्चा का केंद्र बना हुआ है महापौर परिषद यानी एमआईसी का संभावित विस्तार और एल्डरमैन पदों पर होने वाली नियुक्तियां। करीब डेढ़ सप्ताह पहले हुई भाजपा की बंद कमरे की बैठक में शहर विकास के साथ-साथ एमआईसी विस्तार के मुद्दे पर भी गंभीर मंथन हुआ। सूत्रों के मुताबिक बैठक में यह संकेत दिए गए कि कार्यकाल कम बचा होने के बावजूद परिषद का विस्तार किया जा सकता है। इसी खबर के बाहर आते ही भाजपा के भीतर दावेदारों की सक्रियता कई गुना बढ़ गई है। वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनों तरह के पार्षद संगठन के बड़े नेताओं और राजनीतिक आकाओं के दरवाजों पर लगातार दस्तक दे रहे हैं ताकि अंतिम समय में भी उन्हें एमआईसी में जगह मिल सके। कुछ महीनों की कुर्सी, नहीं भविष्य निवेश… नगर निगम की राजनीति में इस समय सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि दावेदार पार्षदों को कार्यकाल कम बचने से कोई खास फर्क नहीं पड़ रहा। कई पार्षदों का मानना है कि यदि उन्हें कुछ महीनों के लिए भी एमआईसी सदस्य बनने का अवसर मिल जाता है, तो यह उनके राजनीतिक करियर के लिए बड़ा निवेश साबित होगा। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक एमआईसी सदस्य का तमगा भविष्य में विधानसभा, महापौर या नगरीय निकाय चुनावों में मजबूत दावेदारी पेश करने का आधार बन सकता है। यही कारण है कि पहली बार चुनाव जीतकर आए युवा पार्षदों से लेकर अनुभवी वरिष्ठ पार्षदों तक के बीच अदृश्य प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है। कोई अपने संगठनात्मक योगदान का हवाला दे रहा है तो कोई जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर दावेदारी मजबूत करने में जुटा है। कई पार्षदों ने अपने समर्थकों और वरिष्ठ नेताओं के जरिए सिफारिशों का दौर भी तेज कर दिया है। संगठन के बड़े नेताओं के यहां बढ़ी आवाजाही ……… एमआईसी विस्तार की चर्चाओं के बाद भाजपा के बड़े नेताओं के आवास और कार्यालय राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र बन गए हैं। जो पार्षद अब तक शांत नजर आ रहे थे, वे भी अचानक सक्रिय हो गए हैं। निगम मुख्यालय से लेकर पार्टी कार्यालयों तक सिर्फ एक ही चर्चा है—किसे मिलेगा एमआईसी में मौका और कौन रहेगा बाहर। हालांकि संगठन का कोई जिम्मेदार पदाधिकारी अभी खुलकर कुछ भी कहने को तैयार नहीं है, लेकिन अंदरूनी स्तर पर नामों को लेकर मंथन लगातार जारी बताया जा रहा है। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अंतिम सूची तैयार करने में क्षेत्रीय संतुलन, संगठन के प्रति निष्ठा और आगामी चुनावी रणनीति को प्रमुख आधार बनाया जा सकता है। एल्डरमैन पदों के लिए भी तेज हुई खेमेबाजी … एमआईसी विस्तार के साथ-साथ नगर निगम में खाली पड़े एल्डरमैन पदों को लेकर भी राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। संगठन के वे नेता जो चुनाव नहीं लड़ पाए थे या हार गए थे, अब एल्डरमैन बनने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। इसके लिए संगठन और सत्ता दोनों स्तर पर लॉबिंग तेज हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार कई नेता इसे राजनीतिक पुनर्वास के अवसर के रूप में देख रहे हैं। नगर सरकार का समय सीमित होने के बावजूद इच्छुक चेहरे इस उम्मीद में सक्रिय हैं कि यदि उन्हें एल्डरमैन पद मिल जाता है तो भविष्य में उनकी राजनीतिक भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं। अंतिम समय में क्यों बढ़ी कवायद.. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगर सरकार के अंतिम महीनों में हो रही यह कवायद केवल पद बांटने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए पार्टी संगठन आगामी विधानसभा और नगरीय निकाय चुनावों के लिए अपने नेताओं को संतुलित और संतुष्ट करने की रणनीति पर काम कर रहा है। लंबे समय से पद की प्रतीक्षा कर रहे नेताओं को मौका देकर संगठन अंदरूनी असंतोष कम करने की कोशिश भी कर सकता है। फिलहाल निगम की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि एमआईसी विस्तार और एल्डरमैन नियुक्तियों की अंतिम सूची कब सामने आएगी। लेकिन इतना तय है कि अंतिम फैसले तक राजनीतिक गलियारों में लॉबिंग, सिफारिशों और खेमेबाजी का दौर लगातार जारी रहेगा। सुनील साहू / शहबाज/ 29 मई 2026/ 07.00