रायसेन। नौतपा की भीषण गर्मी और बदलते मौसम का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। तापमान में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव तथा खानपान में बरती जा रही लापरवाही के चलते जिला अस्पताल में उल्टी-दस्त, डायरिया, सर्दी-खांसी, वायरल फीवर और एलर्जी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी और विभिन्न वार्ड मरीजों से भरे हुए हैं। खासतौर पर मेल-फीमेल वार्ड के साथ बच्चा वार्ड में भी उल्टी-दस्त और डायरिया के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जिला अस्पताल प्रबंधन के अनुसार इन दिनों सुबह और शाम की ओपीडी में मरीजों की संख्या एक हजार के पार पहुंच रही है। इनमें सबसे अधिक मरीज डायरिया, लू और वायरल फीवर से पीड़ित हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों को लगातार सलाइन और आवश्यक दवाइयों के माध्यम से उपचार दिया जा रहा है। सिविल सर्जन डॉ. यशपाल सिंह बाल्यान ने बताया कि गर्मी और मौसम में बदलाव के कारण मरीजों की संख्या बढ़ी है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। वहीं चिकित्सकों ने लोगों को खानपान में सावधानी बरतने और अधिक से अधिक पानी पीने की सलाह दी है। डॉ. सौरभ जैन और डॉ. एल.एन. गुर्जर के अनुसार शरीर में पानी की कमी होने पर मरीजों की हालत गंभीर हो सकती है। समय पर उपचार और सावधानी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि डायरिया और उल्टी-दस्त की स्थिति में मरीजों को तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। एमडी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. एम.एल. अहिरवार तथा चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ. आलोक राय ने बताया कि मौसम में अचानक बदलाव के कारण डायरिया, सर्दी-खांसी और वायरल बुखार के मरीजों में लगातार इजाफा हो रहा है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि उनमें शरीर में पानी की कमी तेजी से होती है जो जानलेवा भी साबित हो सकती है। शाम के बाद इलाज के लिए करना पड़ता है इंतजार जिला अस्पताल में शाम 6 बजे के बाद दवा विंडो और ओपीडी भर्ती पर्चा बंद कर दिए जाने से रैफर होकर आने वाले मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गंभीर हालत में आने वाले मरीजों को भर्ती तो कर लिया जाता है, लेकिन कई बार इलाज शुरू होने में लंबा इंतजार करना पड़ता है। घायल मरीज सुरेश पटेल और रुक्मिणी देवी ने बताया कि सड़क हादसे में घायल होने के बाद उन्हें इलाज मिलने में करीब बारह घंटे का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान असहनीय दर्द के बीच रात गुजारनी पड़ी। मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से रात्रिकालीन व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है। खानपान में बरतें सावधानी डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान में शादी-विवाह का सीजन चल रहा है, जहां लोग मसालेदार और बाहर का भोजन अधिक खा रहे हैं। यही लापरवाही डायरिया और पेट संबंधी बीमारियों की बड़ी वजह बन रही है। चिकित्सकों ने लोगों को सादा, ताजा और स्वच्छ भोजन करने की सलाह दी है। ये सावधानियां रखें हमेशा ताजा भोजन करें। भोजन में ककड़ी और सलाद का उपयोग जरूर करें। तेल एवं मसालेदार भोजन से बचें। ताजे फल और स्वच्छ पानी का सेवन करें। पानी उबालकर या फिल्टर कर पीएं। डायरिया होने पर ओआरएस और नींबू पानी लें। शौच के बाद साबुन से हाथ धोएं। बच्चों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। बाजार के जंक फूड और खुले खाद्य पदार्थों से बचें। पीलिया और हेपेटाइटिस का भी बढ़ा खतरा डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि बारिश के दिनों में दूषित पानी और भोजन के कारण पीलिया और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। लोगों से अपील की गई है कि शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। इनका कहना है “अस्पताल प्रबंधन के आदेश अनुसार शाम 6 बजे के बाद दवा विंडो और ओपीडी फर्स्ट बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद केवल इमरजेंसी मरीजों के लिए नई बिल्डिंग के ट्रॉमा सेंटर में उपचार की व्यवस्था रहती है।” — डॉ. यशपाल सिंह बाल्यान, सिविल सर्जन, रायसेन किशोर वर्मा ईएमएस रायसेन 29/05/2026