अंतर्राष्ट्रीय
30-May-2026
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वॉशिंगटन (ईएमएस)। पश्चिम एशिया में इस समय बेहद दिलचस्प और विरोधाभासी स्थितियां बनी हुई हैं, जहां एक तरफ शांति की मेज पर समझौते की बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ मिसाइल हमले, कड़े प्रतिबंध और सैन्य अभियान भी पूरी शिद्दत से जारी हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बयान में कहा कि ईरान के साथ चल रही शांति वार्ता में काफी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी तक इस प्रस्तावित समझौते यानी मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग को अपनी अंतिम मंजूरी नहीं दी है। वेंस के अनुसार, दोनों पक्ष फिलहाल समझौते के कुछ भाषाई बिंदुओं को स्पष्ट करने में जुटे हैं और उम्मीद है कि राष्ट्रपति जल्द ही इस समझौते का समर्थन करेंगे, लेकिन अभी तक अंतिम रूप से कुछ भी तय नहीं हो पाया है। इस राजनीतिक हलचल के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी अपनी सेना को करीब 70 प्रतिशत गाजा क्षेत्र पर पूर्ण नियंत्रण करने का आदेश दे दिया है, जिसने जमीनी तनाव को और बढ़ा दिया है। इस संभावित समझौते के तहत दोनों देशों के बीच कुछ बड़ी शर्तें तय की जा रही हैं। इसके तहत ईरान इस बात का औपचारिक वादा करने को राजी हुआ है कि उसकी परमाणु हथियार बनाने की कोई इच्छा नहीं है। साथ ही वह अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को छोड़ने पर बातचीत शुरू करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलकर वहां बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए तैयार है। इसके बदले में अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने, उसके तेल कारोबार को राहत पहुंचाने, फ्रीज किए गए फंड को जारी करने पर बात करने के साथ-साथ नौसैनिक घेराबंदी हटाने और लेबनान युद्ध को समाप्त कराने में मदद करने पर सहमत हुआ है। हालांकि, इस बातचीत के समानांतर जमीनी हकीकत काफी हिंसक बनी हुई है। गुरुवार की रात ईरान के बुशेहर प्रांत में एयर डिफेंस सिस्टम अचानक सक्रिय कर दिए गए और ईरानी मीडिया ने दावा किया कि उन्होंने अपने हवाई क्षेत्र में घुसे एक अमेरिकी विमान को मार गिराया है। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को तुरंत खारिज करते हुए कहा कि उनका कोई भी विमान नहीं गिराया गया है। इसी दौरान ईरानी सेना द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिका से जुड़े चार जहाजों को निशाना बनाने की भी खबर आई। इस तनाव के बीच अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरान के सैन्य नेटवर्क से जुड़े तेल कारोबार और राजस्व तंत्र पर नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे साफ है कि बातचीत के बावजूद अमेरिका अपना दबाव कम नहीं कर रहा है। इस लंबे खिंचते संघर्ष में अमेरिका को भी अब तक भारी सैन्य और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस सैन्य टकराव में अब तक कम से कम 42 अमेरिकी सैन्य विमान या तो पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं या उन्हें भारी क्षति पहुंची है। इस पूरे सैन्य अभियान की कुल लागत करीब 29 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। इसके अलावा, अमेरिका ने अपने 24 अत्याधुनिक रीपर ड्रोन और एक निगरानी ड्रोन भी गंवाए हैं। पेंटागन द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस भीषण संघर्ष में अब तक 15 अमेरिकी सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जबकि 538 से अधिक सैनिक गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जो इस युद्ध की भयावहता को दर्शाते हैं। वीरेंद्र/ईएमएस 30 मई 2026