30-May-2026
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बच्चों को डांटना या अनुशासन सिखाना माता-पिता के लिए एक सामान्य और कई बार आवश्यक प्रक्रिया है। यह बच्चों को सही-गलत का फर्क समझने, जिम्मेदारी सीखने और सीमाओं को जानने में मदद करता है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बच्चों को डांटने के बाद माता-पिता द्वारा की गई कुछ गलतियाँ उनके मन पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं और उनके साथ रिश्ते में दरार भी पैदा कर सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, डांट के बाद की सबसे बड़ी गलती अक्सर माता-पिता का बच्चों से दूरी बना लेना या बातचीत बंद कर देना होता है। जब माता-पिता का गुस्सा शांत हो जाता है, तो वे कभी-कभी बच्चे से कट जाते हैं। बच्चे इस चुप्पी को नाराजगी, अस्वीकार या दंड के रूप में समझ सकते हैं। यह उनके मन में असुरक्षा, डर और यह भावना पैदा कर सकता है कि वे अपने माता-पिता के प्यार के हकदार नहीं हैं, जिससे रिश्ते में भावनात्मक दूरी बढ़ सकती है। डांट या किसी बहस के बाद बच्चे लंबी समझाइश या उपदेश नहीं चाहते, बल्कि उन्हें भावनात्मक सहारे और सुरक्षा की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में, माता-पिता का शांत होकर बच्चे के पास बैठना, उससे सामान्य तरीके से बात करना, या हल्का सा स्नेह दिखाना बच्चे को बेहद सुरक्षित और प्यार महसूस कराता है। यह उन्हें यह भरोसा दिलाता है कि भले ही उन्हें उनकी गलती के लिए डांटा गया हो, लेकिन उनके माता-पिता का प्यार अभी भी उनके साथ है। डांट के बाद बच्चे अक्सर शर्मिंदगी, डर, भ्रम या उलझन जैसी विभिन्न भावनाएं महसूस करते हैं। ऐसे में, इन भावनाओं को नजरअंदाज करने या उन्हें तुच्छ समझने के बजाय, उन्हें समझना और स्वीकार करना महत्वपूर्ण है। इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि बच्चे की गलती को सही ठहराया जाए, बल्कि यह बताया जाए कि ऐसी भावनाएं महसूस करना सामान्य है और माता-पिता उन्हें समझने के लिए तैयार हैं। यह बच्चे को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का सुरक्षित माहौल प्रदान करता है। माता-पिता की शांत आवाज और नरम व्यवहार बच्चे के अशांत मन को जल्दी शांत करने में मदद करता है। यह बच्चे को अपनी गलती को बेहतर तरीके से समझने का अवसर देता है और उसके भीतर के तनाव को कम करता है। किसी भी डांट या अनुशासन के बाद, बातचीत का अंत हमेशा प्यार और अपनेपन के साथ होना चाहिए। एक हल्की मुस्कान, एक सहज बातचीत, या बच्चे को गले लगाना उसके मन में यह अटूट भरोसा पैदा करता है कि माता-पिता का प्यार और समर्थन हमेशा उसके साथ रहेगा, भले ही उसने कोई गलती की हो। नारी डेस्क और पंजाब केसरी के विशेषज्ञों का सुझाव है कि इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर माता-पिता अपने बच्चों के साथ एक मजबूत और प्यार भरा रिश्ता बनाए रख सकते हैं। 30 मई ईएमएस फीचर