30-May-2026
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लेखन एक कला है, और बच्चों को इसमें निपुण बनाना अपने आप में एक बड़ी चुनौती तथा कला है। बहुत से माता-पिता को यह समस्या होती है कि बच्चों को लिखना कैसे सिखाया जाए। बच्चों को सुंदर लेखन के लिए प्रेरित करने में माता-पिता, अध्यापक तथा घर के अन्य बड़े सदस्यों का निरंतर सहयोग अपरिहार्य है। पठन की तुलना में लेखन को अक्सर अधिक कठिन माना जाता है, और बच्चों को इसमें पारंगत करने के लिए लगातार प्रयास की आवश्यकता होती है। प्रारंभिक अवस्था में बच्चों को लेखन की शिक्षा का आधार घर पर ही रखा जाता है। यह देखा गया है कि जो बच्चे जल्दी पढ़ना सीख लेते हैं, उन्हें लिखने में अधिक समय लग सकता है। इसलिए, पढ़ाई की तरह ही लेखन का भी निरंतर और धैर्यपूर्ण अभ्यास आवश्यक है। यदि बच्चा परिश्रम करके कुछ लिखता है, तो बड़ों को चाहिए कि वे उसे ध्यान से देखें और उसे पढ़कर सुनाने के लिए कहें। यह छोटी सी पहल बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाती है और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है। सामान्यतः बच्चे वही लिखना पसंद करते हैं जो उन्हें सरल लगता है, और वे लिखने-पढ़ने में जल्दबाजी नहीं करते। जब बच्चा विद्यालय जाना शुरू करता है, तो यह जिम्मेदारी शिक्षकों पर आ जाती है, लेकिन माता-पिता की भूमिका तब भी समाप्त नहीं होती। उन्हें यह सुनिश्चित करना होता है कि बच्चा स्पष्ट और सुंदर लेखन जारी रखे। शिक्षकों का सुझाव है कि सर्वप्रथम बच्चों को छपी हुई वर्णमाला पढ़ना सिखाई जाए ताकि वे अक्षरों को पढ़ने व पहचानने की क्षमता विकसित कर सकें। साथ ही, अभिभावकों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे पेंसिल को कसकर न पकड़ें, क्योंकि इससे उनकी आँखों पर अनावश्यक दबाव पड़ सकता है और परिणामस्वरूप शीघ्र ही उन्हें चश्मा पहनना पड़ सकता है। इस आदत पर प्रारंभ से ही नियंत्रण रखना चाहिए। आज की पीढ़ी के बच्चे काफी कम उम्र में ही लिखने-पढ़ने में रुचि दिखाने लगते हैं, खासकर दूरदर्शन, रेडियो आदि जैसे माध्यमों के प्रभाव से वे जल्द समझदार हो जाते हैं। उनमें बड़ों को देख कर लिखने की इच्छा जागृत होती है। वे अपना, अपने मित्रों तथा माता-पिता का नाम लिखने का प्रयास करते हैं। ऐसे में बड़ों को इस अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिए और बच्चों में सही व सुंदर लिखने को प्रोत्साहित करना चाहिए। बच्चों में सीखने की स्वाभाविक जिज्ञासा होती है, और वे बड़ों की बातों को बहुत गंभीरता से लेते हैं, जिससे उनकी लेखन योग्यता तेजी से विकसित होती है। जो कुछ भी लिखवाया जा रहा है, उसे जोर-जोर से बोलकर सुनाना चाहिए ताकि बच्चा शब्दों को अच्छी तरह से सुने और ठीक वैसा ही लिख सके। यदि बच्चा अशुद्ध या अस्पष्ट लिख रहा है, तो उसे डांटने या फटकारने के बजाय प्यार से समझाना चाहिए। नकारात्मक प्रतिक्रिया से बच्चों में हीन भावना आ सकती है और वे यह मान सकते हैं कि वे सुंदर लिख ही नहीं सकते। यह अत्यंत आवश्यक है कि बच्चे को यह महसूस हो कि उसके प्रयासों पर माता-पिता खुश हैं, क्योंकि यह उसके उत्साह को बढ़ाता है। बच्चे किसी एक काम से बहुत जल्दी ऊब जाते हैं, इसलिए लेखन को जबरदस्ती नहीं करवाना चाहिए। उनसे ऐसी चीजें लिखवाएं जिनमें उनकी रुचि पैदा हो, जिससे यह प्रक्रिया आनंददायक और प्रभावी बनी रहे। 30 मई ईएमएस फीचर