नई दिल्ली,(ईएमएस)। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरा यूरोप भी इस साल भीषण गर्मी झेल रहा है। आमतौर पर जहाँ ठंडा मौसम रहता है, वहाँ भी जानलेवा गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल किया है। लंदन में पिछले 14 वर्षों की सबसे गर्म रात दर्ज हुई, जब बीती रात का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया। पूरे एशिया और यूरोप में फैली भीषण गर्मी की लहर ने आधुनिक शहरों की बढ़ती कमजोरियों, कमजोर बुनियादी ढाँचों और लाखों निवासियों की मुश्किलों को उजागर किया है, जो जानलेवा हद तक बढ़े तापमान से जूझ रहे हैं। गर्मी की शुरुआत में ही आई इस लू की तीव्रता ने मौसम वैज्ञानिकों और आम लोगों, दोनों को ही चिंता में डाल दिया है। उत्तरी भारत, नौतपा में तप रहा है, इस पारंपरिक रूप से गर्मियों का सबसे गर्म दौर माना जाता है। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में तापमान 40 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुँच गया है, और कुछ इलाकों में 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुँचने की संभावना है। इस महीने में एक ऐसा भी दिन आया जब दुनिया के सबसे ज्यादा गर्म 50 शहरों में से सभी भारतीय थे, जो गर्मी की गंभीरता को दिखाता है। दूसरी ओर पश्चिमी यूरोप भी अपने आप में अभूतपूर्व मौसमी परिस्थितियों का सामना कर रहा है। यूनाइटेड किंगडम ने लगातार दो दिनों तक मई महीने के अपने अब तक के सबसे ज्यादा तापमान का रिकॉर्ड तोड़ दिया। दक्षिण-पश्चिम लंदन के क्यू गार्डन्स में तापमान 35.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया था, जो उस रिकॉर्ड को तोड़ने के ठीक एक दिन बाद हुआ जो 1944 से कायम था। फ्रांस में भी असामान्य रूप से ज्यादा तापमान दर्ज हुआ और मौसम एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि यह लू पूरे हफ्ते जारी रह सकती है, इससे तापमान 39 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुँच सकता है। तापमान में अचानक हुई इस बढ़ोतरी से फ्रांस में कई लोगों की मौत हो चुकी है। पहले गर्मी के दिनों में यूरोप में ठंडक रहती थी, लेकिन अब हालात बिल्कुल बदल चुके हैं और यूरोपीय घरों में एयर कंडीशनर लगने शुरू हो गए हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरोप में इतनी जल्दी और इतनी तेज गर्मी का कारण एक बहुत बड़ा हाई-प्रेशर सिस्टम है जो उत्तरी अफ्रीका से आने वाली गर्म हवा को रोक रहा है। यह सिस्टम पश्चिमी यूरोप के ऊपर एक तरह से ढक्कन की तरह काम कर रहा है, जिससे ठंडी हवा का बहाव रुक गया है और पूरे इलाके में तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। यह लू मौसम में हो रहे एक बड़े बदलाव का भी संकेत है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले कुछ ही वर्षों में लंदन का तापमान गर्मी के दिनों में 40 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रहना आम हो जाएगा। यूएस नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के डेटा से पता चलता है कि 1990 के बाद से यूरोप सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन गया है और एशिया भी उससे ज्यादा पीछे नहीं है। वैज्ञानिक चेतावनी देते हैं कि बढ़ता हुआ औसत तापमान अब उन बुनियादी ढाँचों और शहरी योजनाओं के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है जिन्हें पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा हल्के मौसम के हिसाब से बनाया गया था। लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तरी यूरोप के कई हिस्सों में अब भूमध्यसागरीय इलाकों जैसी गर्मी पड़ने लगी है जबकि वहाँ के घर, दफ्तर और सरकारी इमारतें इतनी ज्यादा और लंबे समय तक चलने वाली गर्मी को झेलने के हिसाब से कभी बनाई ही नहीं गई थीं। यह स्थिति वैश्विक जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणामों की स्पष्ट चेतावनी है, जिसके लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाना अनिवार्य है। आशीष/ईएमएस 30 मई 2026