राष्ट्रीय
30-May-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। आयुष मंत्रालय लगातार लोगों को योग अपनाकर स्वस्थ और रोगमुक्त जीवन जीने का संदेश दे रहा है। मंत्रालय द्वारा हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर जारी पोस्ट में माइग्रेन जैसी गंभीर समस्या से राहत पाने के लिए योग को प्राकृतिक और प्रभावी उपाय बताया है। मंत्रालय का कहना है कि नियमित योगाभ्यास से माइग्रेन की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार माइग्रेन सामान्य सिरदर्द से कहीं अधिक गंभीर समस्या है। इसमें सिर के एक हिस्से में तेज दर्द होता है और इसके साथ जी मिचलाना, चक्कर आना, तेज रोशनी और तेज आवाज से परेशानी जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। आधुनिक जीवनशैली, घंटों मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठना, गलत मुद्रा में काम करना, पर्याप्त नींद न लेना और लगातार तनाव माइग्रेन को बढ़ाने वाले प्रमुख कारण माने जाते हैं। इससे गर्दन, कंधे और सिर की मांसपेशियों में तनाव बढ़ता है, जो धीरे-धीरे माइग्रेन के दौरे को ट्रिगर कर सकता है। आयुष मंत्रालय और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय नियमित योगाभ्यास लंबे समय में अधिक लाभकारी साबित हो सकता है। योग से शरीर की मुद्रा सुधरती है, मांसपेशियों का तनाव कम होता है और रक्त संचार बेहतर बनता है। साथ ही मन को शांति मिलने से तनाव घटता है, जिससे माइग्रेन की तीव्रता कम होने लगती है। मंत्रालय ने माइग्रेन से राहत के लिए भुजंगासन, पवनमुक्तासन, मार्जरी आसन और ताड़ासन जैसे योगासन तथा भ्रामरी और शीतली प्राणायाम को विशेष रूप से फायदेमंद बताया है। भुजंगासन रीढ़ और गर्दन को मजबूत बनाता है, जबकि पवनमुक्तासन गैस और अपच से राहत देने में मदद करता है। मार्जरी आसन गर्दन और पीठ की अकड़न दूर करता है और ताड़ासन शरीर की मुद्रा सुधारने के साथ एकाग्रता बढ़ाने में सहायक माना जाता है। वहीं भ्रामरी प्राणायाम मानसिक तनाव कम कर सिरदर्द में राहत देता है और शीतली प्राणायाम शरीर को ठंडक पहुंचाने में मददगार होता है। सुदामा/ईएमएस 30 मई 2026