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31-May-2026
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थिएटर कमांड लागू करना होगी सबसे बड़ी चुनौती -पाकिस्तान-चीन मामलों के जानकार माने जाते हैं नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ नई दिल्ली,(ईएमएस)। देश के नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने रविवार को औपचारिक रूप से पदभार ग्रहण कर लिया। दक्षिण ब्लॉक लॉन्स में आयोजित समारोह में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। वह भारत के तीसरे सीडीएस बने हैं और उन्होंने जनरल अनिल चौहान का स्थान लिया है, जो शनिवार को सेवानिवृत्त हुए थे। पदभार संभालने के बाद जनरल सुब्रमणि ने कहा कि भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना, रक्षा मंत्रालय तथा अन्य सभी संबंधित संस्थान देश की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह एकजुट हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में स्वदेशी हथियारों और सैन्य उपकरणों के विकास, खरीद तथा उपयोग की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा। साथ ही आधुनिक युद्ध की चुनौतियों को देखते हुए सेना में नई सोच और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा। रक्षा मामलों के जानकार जनरल सुब्रमणि को चीन और पाकिस्तान से जुड़े सामरिक विषयों का विशेषज्ञ माना जाता है। ऐसे समय में उनकी नियुक्ति हुई है जब भारत अपनी सैन्य संरचना में बड़े बदलावों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके सामने सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी तीनों सेनाओं के लिए प्रस्तावित थिएटर कमांड व्यवस्था को लागू करने की होगी। दरअसल, हाल ही में सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया था कि थिएटर कमांड मॉडल को लेकर तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट रक्षा मंत्री को सौंप दी गई है और विभिन्न स्तरों पर उसका परीक्षण चल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि अगले दो से तीन वर्षों में यह व्यवस्था जमीन पर दिखाई देने लगेगी। वर्तमान में भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना की कुल 17 अलग-अलग कमांड हैं। किसी भी सैन्य अभियान के दौरान तीनों सेनाएं आपसी समन्वय से काम करती हैं, लेकिन उनकी कमान अलग-अलग अधिकारियों के हाथ में रहती है। प्रस्तावित थिएटर कमांड व्यवस्था में किसी विशेष क्षेत्र या मिशन के लिए एकीकृत कमांडर नियुक्त होगा, जिसके अधीन तीनों सेनाओं की इकाइयां मिलकर कार्य करेंगी। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और युद्धक क्षमता में वृद्धि होगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जनरल सुब्रमणि थिएटर कमांड प्रणाली को सफलतापूर्वक लागू करने में सफल रहते हैं, तो यह भारतीय सैन्य ढांचे में स्वतंत्रता के बाद का सबसे बड़ा सुधार साबित हो सकता है। हिदायत/ईएमएस 31मई26