रायपुर(ईएमएस)। नवा रायपुर स्थित नंदनवन जू और जंगल सफारी घूमने की योजना बना रहे पर्यटकों को अब अपनी जेब पहले से अधिक ढीली करनी होगी। छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने जू और सफारी से जुड़ी विभिन्न सेवाओं की टिकट दरों में संशोधन करते हुए नई शुल्क व्यवस्था लागू कर दी है। नई दरों के लागू होने के बाद अधिकांश श्रेणियों में टिकट कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। नई टिकट नीति के अनुसार, 6 से 12 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए जू प्रवेश शुल्क 25 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है। वहीं 12 वर्ष से अधिक आयु के पर्यटकों के लिए प्रवेश शुल्क 50 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है। विदेशी पर्यटकों पर सबसे अधिक असर पड़ा है। उनके लिए प्रवेश शुल्क 200 रुपये से बढ़ाकर सीधे 500 रुपये कर दिया गया है। हालांकि 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए प्रवेश अब भी नि:शुल्क रहेगा, लेकिन इसके लिए वैध पहचान पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। नई नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह छूट सप्ताहांत, सार्वजनिक अवकाश और अन्य सरकारी छुट्टियों के दौरान लागू नहीं होगी। वन विभाग का कहना है कि टिकट दरों में वृद्धि का उद्देश्य जंगल सफारी और नंदनवन जू में उपलब्ध सुविधाओं को और बेहतर बनाना है। विभाग के अनुसार, बढ़ी हुई आय का उपयोग वन्यजीव संरक्षण, रखरखाव, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि बढ़ती पर्यटक संख्या को देखते हुए सुविधाओं के उन्नयन के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है। गौरतलब है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में जंगल सफारी के टिकट शुल्क में कमी की गई थी। उस समय नंदनवन जू का प्रवेश भी जंगल सफारी पैकेज में शामिल था, लेकिन बाद में दोनों सेवाओं को अलग-अलग कर दिया गया। अब नई दरों के लागू होने के बाद पर्यटकों को अलग-अलग टिकट के लिए अधिक भुगतान करना होगा। नवा रायपुर के सेक्टर-39 में स्थित नंदनवन जंगल सफारी राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। यह रायपुर रेलवे स्टेशन से लगभग 35 किलोमीटर और स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। लगभग 800 एकड़ क्षेत्र में फैला यह सफारी परिसर प्राकृतिक हरियाली और वन्यजीवों की विविधता के लिए जाना जाता है। यहां 130 एकड़ में फैला खांडवा जलाशय भी स्थित है, जो प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना माना जाता है। जंगल सफारी परिसर में शाकाहारी सफारी, भालू सफारी, टाइगर सफारी और शेर सफारी जैसी अलग-अलग थीम आधारित व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक वातावरण तैयार करने के उद्देश्य से पूरे क्षेत्र में हजारों पौधे लगाए गए हैं और जल, छाया तथा आश्रय की समुचित व्यवस्था की गई है। पर्यटक विशेष सफारी वाहनों के माध्यम से निर्धारित मार्गों पर वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक परिवेश में देख सकते हैं। वर्तमान में यहां बाघ, भालू और विभिन्न शाकाहारी प्रजातियों सहित बड़ी संख्या में वन्यजीव मौजूद हैं। नई टिकट दरों के साथ अब पर्यटकों को बेहतर सुविधाओं की उम्मीद तो है, लेकिन बढ़ी हुई कीमतों का असर उनकी जेब पर भी साफ दिखाई देगा। सत्यप्रकाश(ईएमएस)30 मई 2026