व्यापार
31-May-2026


- तिलहन उत्पादन पर संकट, धान की ओर बढ़ते किसानों पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता नई ‎दिल्ली (ईएमएस)। देश के तेल-तिलहन बाजारों में मई 2026 के अंतिम सप्ताह में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जहां एक ओर अचार कंपनियों की बढ़ती मांग और मंडियों में कमजोर आवक ने सरसों व बिनौला तेल की कीमतों को मजबूती दी, वहीं दूसरी ओर भारतीय रुपये की डॉलर के मुकाबले शानदार रिकवरी के चलते सोयाबीन, पाम और पामोलीन तेल के दाम गिरावट के साथ बंद हुए। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आगामी बरसात को देखते हुए अचार बनाने वाली कंपनियों की बढ़ी खरीदारी और सरसों की कमजोर आवक ने इसके दामों को मजबूत किया। इसी क्रम में, कपास की आवक घटने से बिनौला तेल की उपलब्धता प्रभावित हुई, जिससे इसकी कीमतों में भी सुधार आया। सरकार ने कपड़ा मिलों को राहत देने के लिए कपास पर लगने वाले 10 फीसदी आयात शुल्क को शून्य कर दिया है। इसके विपरीत, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की शानदार रिकवरी ने विदेशों से खाद्य तेलों का आयात सस्ता कर दिया। इस वजह से सोयाबीन, पाम और पामोलीन तेलों में गिरावट दर्ज हुई। सरकार ने कच्चे पाम तेल और पामोलीन के आयात शुल्क मूल्य में वृद्धि की, जबकि सोयाबीन डीगम तेल के शुल्क मूल्य में कमी की। महाराष्ट्र और तेलंगाना में नेफेड द्वारा सोयाबीन बेचने के लिए कम बोली वाली निविदाएं निरस्त कर दी गईं, जिसके बाद जानकारों ने किसानों के हित में अगले कुछ महीनों तक सोयाबीन की सीमित बिक्री की सिफारिश की है। मूंगफली तेल के दाम इस हफ्ते स्थिर बने रहे। यह फिलहाल आयातित सूरजमुखी तेल से सस्ता मिल रहा है, हालांकि इसका दाम अब भी न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे चल रहा है। बीते सप्ताह खाद्य तेल बाजार में एक मिली-जुली तस्वीर सामने आई। जहां सरसों और बिनौला तेल के भावों में तेजी दर्ज की गई, वहीं सोयाबीन और पाम तेल गिरावट के साथ बंद हुए। इस बीच, बाजार विशेषज्ञों ने देश में तिलहन उत्पादन बढ़ाने और किसानों के धान की ओर बढ़ते रुझान पर चिंता जताई है। बंद भावों के अनुसार, सरसों दाना 150 रुपए की तेजी के साथ 7,775-7,800 रुपए प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। सरसों तेल (थोक) और बिनौला तेल में भी क्रमशः 50 और 75 रुपए प्रति क्विंटल का सुधार देखा गया। दूसरी ओर, सोयाबीन दाना 200 तक टूटकर 7,425-7,475 रुपए प्रति क्विंटल रहा, जबकि सोयाबीन तेल में 100 से 140 रुपए तक की गिरावट आई। पाम ऑयल भी 25 से 125 रुपए तक फिसला। मूंगफली तेल स्थिर बना रहा। विशेषज्ञों ने सरकार से अपील की है कि पारंपरिक तिलहन उत्पादक राज्यों में किसानों के धान की खेती की ओर मुड़ने के कारणों की गंभीरता से समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि इन मुद्दों को हल करके ही भारत खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ सकता है। सतीश मोरे/31मई ---