31-May-2026
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- दाल, चावल, शक्कर सब महंगा भोपाल (ईएमएस)। ईरान-अमेरिका युद्ध से उत्पन्न हुए वैश्विक तेल संकट का असर अब भारत पर तेजी से पडऩे लगा है। बीते 15 दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढऩे से महंगाई का असर साफ दिखने लगा है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढऩे से ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है, जिससे फल और सब्जी से लेकर किराना सामग्री तक में 7 से लेकर 10 प्रतिशत तक की महंगाई देखी जा रही है। किराना सामग्री और फल जिसमें सेवफल, आम और केला के दामों पर महंगाई का असर सबसे अधिक पड़ा है। तो वहीं दाल, चावल से लेकर शक्कर तक के दाम बढ़ गए हैं। भोपाल ही नहीं, मप्र के सभी प्रमुख शहरों में फल सब्जी व किराना व्यापारियों पर महंगे ट्रांसपोर्ट का असर पड़ा है, जिसका सीधा असर अब उपभोक्ताओं की जेब पर पडऩे लगा है। - किराना में बादाम, काजू, चावल, दाल महंगे किराना व्यापारी महेश शर्मा ने बताया कि बीते 15 दिनों में ही किराना सामग्री पर 5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। दालों में 5 रु किलो की वृद्धि हुई है. शक्कर में 1.5 रुपए प्रति किलो, बादाम पर 40 रूपए प्रति किलो, काजू में 30 रूपए किलो की वृद्धि देखी गई है। पेट्रोल और डीजल का रेट बढ़ाने की वजह से ट्रांसपोर्ट की कॉस्टिंग बढऩे लगी है। 15 दिनों में ही इसका असर किराना सामग्री पर देखने को मिल रहा है। अब उम्मीद यही की जा रही है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत कम होगी तो महंगाई पर लगाम लगेगी। - फल और सब्जियों के दाम भी छूने लगे आसमान किराना सामग्री ही नहीं, फल और सब्जियों पर भी पेट्रोल-डीजल की बढ़ी हुई कीमतों का असर हुआ है। फल व सब्जी व्यापारी हर्ष सिंह ने बताया कि फल में सबसे ज्यादा असर महाराष्ट्र और गुजरात से लाए जाने वाले आम और केला की कीमतों पर पड़ा है। दोनों में 10 रूपए प्रति किलो की वृद्धि हो गई है। वहीं, जम्मू कश्मीर और हिमाचल से आने वाले सेवफल की कीमत भी बढ़ गई है। सेवफल की कीमत 300 रूपए प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गई है। आम 80 रूपए किलो से 150 रूपए किलो तक बिक रहे हैं, वहीं केला 45 रुपए प्रति किलो से 55 किलो तक बिक रहा है। वहीं, सब्जी विक्रेता राजाराम माली ने बताया कि टमाटर, गिलकी, मिर्ची, नींबू और हरे धनिया की कीमत बढ़ गई है। 15 दिन पहले जो सब्जियां 40 से 50 रूपए किलो में मिल रही थीं, वहीं सब्जियां अब 60 से 80 रुपए किलो में बिक रही हैं। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती हुई कीमतों की वजह से महंगाई बढऩे लगी है, जिसका सर्वाधिक असर मध्यम वर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढऩे की वजह से दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतें अब आसमान छूने लगी हैं। देखना होगा कि कब लोगों को इससे राहत मिलती है। - 31 मई /2026