* दूध उत्पादन में भारत विश्व में शीर्ष स्थान पर अहमदाबाद (ईएमएस)| हर वर्ष 1 जून को पूरी दुनिया में “विश्व दुग्ध दिवस” मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक खाद्य के रूप में दूध के महत्व को उजागर करना और डेयरी उद्योग को प्रोत्साहित करना है। आज दूध केवल एक पौष्टिक आहार नहीं रहा, बल्कि पशुपालन से जुड़े करोड़ों परिवारों की आजीविका का मजबूत आधार स्तंभ बन चुका है। * वैश्विक स्तर पर भारत का डंका: दूध उत्पादन में विश्व में प्रथम भारत वर्ष 1998 से दूध उत्पादन और डेयरी विकास के क्षेत्र में पूरे विश्व में प्रथम स्थान पर बना हुआ है। आज देश का वार्षिक दूध उत्पादन लगभग 247 मिलियन टन है, जो वैश्विक दूध उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत का योगदान देता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार की विभिन्न प्रोत्साहक नीतियों के कारण पिछले एक दशक में देश के कुल दूध उत्पादन में 69 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि उत्पादन प्रति वर्ष 5.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। देश की कुल जीडीपी में डेयरी क्षेत्र का योगदान लगभग 5 प्रतिशत है। देश में दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता भी पिछले एक दशक में 52 प्रतिशत बढ़कर आज 485 ग्राम प्रतिदिन हो गई है, जो नागरिकों के पोषण स्तर में सुधार का मजबूत प्रमाण है। * गुजरात की श्वेत क्रांति 2.0: दो दशकों में 12.5 मिलियन टन की वृद्धि मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और पशुपालन मंत्री जीतू वाघाणी के नेतृत्व में गुजरात आज डेयरी उद्योग में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। गुजरात आज वार्षिक 19 मिलियन टन से अधिक दूध उत्पादन के साथ भारत के कुल दूध उत्पादन में 7.78 प्रतिशत का महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। पिछले दो दशकों की बात करें तो राज्य के दूध उत्पादन में 12.5 मिलियन टन की रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप गुजरात आज देश में चौथे स्थान पर पहुंच गया है। इस अवधि के दौरान औसत वार्षिक विकास दर 9.30 प्रतिशत रही है। गुजरात के लिए सबसे गौरव की बात यह है कि राज्य में दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता पिछले एक दशक में 48 प्रतिशत बढ़कर आज 730 ग्राम प्रतिदिन हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम प्रतिदिन से काफी अधिक है। * पशु स्वास्थ्य और सुदृढ़ उपचार व्यवस्था दूध उत्पादन में वृद्धि के लिए पशुओं का उत्तम स्वास्थ्य अत्यंत आवश्यक है। जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने पशुओं को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का दृढ़ संकल्प लिया था, जिसके अनुसार आज गुजरात की लगभग ढाई करोड़ पशु संपदा को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच प्रदान किया जा रहा है। * राज्य की सुदृढ़ पशु चिकित्सा संरचना: 1,137 पशु औषधालय और 564 प्राथमिक पशु उपचार केंद्र। 587 मोबाइल पशु औषधालय, जो गांव-गांव जाकर पशुओं का उपचार करते हैं। 34 बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय और 21 पशु रोग अनुसंधान इकाइयाँ। पशुधन की रक्षा के लिए राज्य में कुल 4,710 पंजीकृत पशु चिकित्सक कार्यरत हैं। * पशु संवर्धन में आधुनिक तकनीक और सहायता गुजरात सरकार केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुओं की नस्ल सुधार के लिए भी प्रतिबद्ध है। पशुपालकों को बहुत ही कम दरों पर ‘सेक्स्ड सीमेन डोज’ उपलब्ध कराई जाती है, जिसकी सफलता दर 90 प्रतिशत से अधिक है, अर्थात 90 प्रतिशत पशु बछड़ियों को जन्म देते हैं। इसके अलावा पशुओं में आधुनिक आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) तकनीक के खर्च को कम करने के लिए सरकार द्वारा पशुपालकों को सब्सिडी भी दी जा रही है। * ‘अमूल एआई’ और डिजिटल क्रांति: पशुपालन में आधुनिकता का समन्वय फरवरी 2026 में अमूल द्वारा एक क्रांतिकारी प्लेटफॉर्म ‘अमूल एआई’ लॉन्च किया गया। इस पहल के तहत पशुपालकों के लिए 24x7 डिजिटल मार्गदर्शक के रूप में ‘सरलाबेन’ एआई सहायक कार्यरत है। यह एआई प्रणाली राज्य के 36 लाख से अधिक किसान-दूध उत्पादकों को पशु स्वास्थ्य, संतुलित पोषण, नस्ल सुधार और सरकारी योजनाओं के बारे में वैज्ञानिक और व्यक्तिगत मार्गदर्शन मोबाइल पर उपलब्ध कराती है। * डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करोड़ों की सहायता राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम के तहत पिछले 5 वर्षों में 1,606 बल्क मिल्क कूलर, 3,233 ऑटोमेटिक मिल्क कलेक्शन सिस्टम और 1,212 मिल्क मिलावट जांच मशीनों के लिए रु. 239.73 करोड़ की सहायता दी गई है। एनिमल हसबेंडरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड के तहत राज्य के विभिन्न सहकारी संघों और निजी डेयरियों के रु. 3,425.57 करोड़ के प्रोजेक्ट्स के लिए रु. 2,691.29 करोड़ की ब्याज सहायता स्वीकृत की गई है। डेयरी सहकारी समितियों को समर्थन देने के लिए पिछले 5 वर्षों में रु. 573.77 करोड़ की सहायता दी गई है। सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र के जूनागढ़, जामनगर, सुरेंद्रनगर, मोरबी और पोरबंदर जिला दुग्ध उत्पादक संघों के लिए रु. 78.06 करोड़ के प्रोजेक्ट्स हेतु रु. 23.09 करोड़ की राशि राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गई है। गुजरात सरकार की बहुआयामी योजनाओं और पशुपालकों की कठोर मेहनत के बल पर राज्य आने वाले समय में भारत का अग्रणी और मॉडल दुग्ध उत्पादक राज्य बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। सतीश/31 मई