लेख
01-Jun-2026
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याद आते गांव। बैठक की खाट, गंगा नदी घाट, बरगद की छांव, याद आते गांव। बचपन के खेल, छुक छुक चल रेल, कागज की नाव, याद आते गांव। हर हफ्ते हाट, जहां खाते चाट, थके नहीं पांव, याद आते गांव। होते सह भोज, स्कूल जाते रोज, नंगे नंगे पांव, याद आते गांव। जहां मीठा जल, बाग में मिले फल, आदर मृदु भाव, याद आते गांव। मिले सुबह-शाम, कहते राम राम, बसे प्रेम भाव, याद आते गांव। सुबह-सुबह धूप, मिले चावल सूप, ठंड में आलाव, याद आते गांव। शहरी जिंदगी, हर तरफ गंदगी, थके हुए पांव , याद आते गांव। (स्वतंत्र पत्रकार साहित्यकार) .../ 1 जून /2026