आखिर यूपी पुलिस ने बकरीद के दिन एक सत्रह साल के हिन्दू छात्र की चाकू घोंप कर नृशंसता भरी बर्बर हत्या करने वाले मुख्य हत्यारे असद का एनकाउंटर कर अराजक हिंसक तत्वों को कड़ा संदेश दे दिया है। उधर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने सूर्या प्रताप चौहान हत्याकांड का जिक्र करते हुए स्पष्ट और सख्त लहजे में कहा है कि दोस्ती की आड़ में छुरेबाजी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। बिजनौर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने इस मामले पर कड़े निर्देश दिए उन्होंने शोहदों और ऐसे अपराध करने वाले युवाओं को नसीहत देते हुए कहा कि नालायक औलादों को समझाना जरूरी है, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें। सरकार कानून का पालन करने वाले आम नागरिकों के साथ खड़ी है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा संदेश साफ है कि यूपी को बांग्लादेश या पाकिस्तान समझना भूल होगी। बर्बरता और जघन्यता का माकूल जबाव पुलिस बिना देरी के देगी। आपको बता दें देश के कई इलाकों में जिस तरह की सांप्रदायिक नफरत और प्रतिशोध से भरी वारदातें सामने आती हैं उस से लगता है कि इन वारदातों के पीछे कोई ऐसी पूरी सुनियोजित साजिश रहती है जो नफरत और खूनी दरिंदगी भरी मानसिकता का बीजारोपण करती है पिछले कुछ समय में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इस से सटे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में ऐसी कई बर्बरता भरी वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है जिनसे लगता है कि कानूनी सख्ती के बावजूद दरिंदों में पुलिस और कानून का रंचमात्र भय नहीं है। ताज़ा घटनाक्रम में गाजियाबाद से एक बेहद सनसनीखेज और कलेजा कँपा देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ खोड़ा थाना क्षेत्र में बकरीद के दिन एक 17 वर्षीय हिंदू किशोर, सूर्या चौहान की उसके ही पूर्व परिचित मुस्लिम दोस्तों ने बेरहमी से चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी। इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने से ठीक पहले कट्टरपंथी हमलावरों ने पीड़ित से पूछा, “क्या तुमने कभी बकरा हलाल होते देखा है? आज तुझे दिखाते हैं।” आरोप है कि यह कहते ही उन्होंने सूर्या पर ताबड़तोड़ चाकुओं से हमला कर दिया। नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने रविवार के तड़के मुख्य आरोपी असद को मुठभेड़ में ढेर कर दिया है इस से पहले 3 नामजद आरोपितों को गिरफ्तार किया और 2 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया । आपको बता दें मृतक सूर्या चौहान मूल रूप से एटा का रहने वाला था। वह नवनीत विहार, खोड़ा में अपनी माँ, बड़े भाई यश चौहान और छोटी बहन के साथ रहता था। उसके पिता कौशलेंद्र की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। सूर्या 11वीं कक्षा का छात्र था। जानकारी के मुताबिक, करीब 8 महीने पहले सूर्या का पड़ोस में रहने वाले असद नाम के युवक से किसी बात पर मामूली विवाद हुआ था। इसी पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए असद ने बकरीद के पवित्र दिन को चुना। 28 मई की दोपहर को असद ने सूर्या को फोन किया। उसने सूर्या को बकरीद की पार्टी के बहाने मिलने के लिए चौधरी स्कूल के पास वाली गली नंबर 2 में बुलाया।सूर्या अपने दोस्त आयुष और विक्की के साथ असद से मिलने पहुँचा था। विक्की और आयुष ने आँखों देखा हाल बताते हुए बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया। विक्की ने बताया कि जैसे ही वे गली में पहुँचे, वहाँ पहले से ही असद, नवाब, फरहान, आतिफ और सारिक समेत 5 से 6 मुस्लिम युवक हथियारों के साथ घात लगाकर बैठे थे बताया जा रहा है कि आते ही उन्होंने सूर्या को चारों तरफ से दबोच लिया। इसके बाद उन्होंने सांप्रदायिक और हिंसक टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या कभी बकरा हलाल होते देखा है? बताया गया है कि आरोपितों ने चिल्लाते हुए कहा कि आज बकरीद है और आज कुर्बानी इस हिंदू लड़के की देंगे। यह कहते ही सभी आरोपितों ने सूर्या पर बड़े चाकुओं से हमला बोल दिया। उन्होंने सूर्या के पेट, सीने और शरीर के अन्य हिस्सों पर ताबड़तोड़ कई वार किए। हमला इतना बर्बर था कि चाकुओं की गोदने की वजह से सूर्या की आंतें तक बाहर आ गईं।मौके पर चीख-पुकार और शोर मच गया। शोर सुनकर पास ही मौजूद सूर्या का भाई यश चौहान और उसकी माँ दौड़ते हुए घटना स्थल की तरफ भागे। परिजनों को अपनी तरफ आता देख सभी मुस्लिम हमलावर खून से लथपथ सूर्या को तड़पता हुआ छोड़कर मौके से फरार हो गएपरिजन आनन-फानन में गंभीर रूप से घायल सूर्या को नोएडा के सेक्टर-62 स्थित फोर्टिस अस्पताल लेकर पहुँचे। वहाँ डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद अगले दिन यानी 29 मई को दोपहर करीब 12 बजे सूर्या ने दम तोड़ दिया। सूर्या की मौत की खबर जैसे ही खोड़ा इलाके में फैली, वहाँ भारी रोष और सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बन गई। हिंदू समाज का कहना है कि यह केवल दो गुटों की लड़ाई नहीं, बल्कि बहुसंख्यक समाज की सुरक्षा पर सीधा प्रहार है। आपको बता दें कि यूपी के गाजियाबाद और इस से सटे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के आस-पास के क्षेत्रों में हत्या के कुछ हालिया मामलों में मुस्लिम समुदाय से जुड़े आरोपियों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, पुलिस जांच और आधिकारिक रिपोर्टों में इन घटनाओं को सुनियोजित या समुदाय-विशिष्ट घृणा के बजाय मुख्य रूप से आकस्मिक विवादों, पुरानी दुश्मनी या आपसी रंजिश का परिणाम बताया गया है।आपको दो माह पहले जेजे कालोनी उत्तम नगर की नृशंसता भरी वारदात याद होगी यहां हिन्दू त्योहार होली के दिन रंग-बिरंगे पानी के छींटे पड़ने और गुब्बारा लगने को लेकर दो समुदाय से जुड़े परिवारों के बीच विवाद हुआ था। इस घटना में 26 वर्षीय तरुण कुमार की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में हत्या का केस दर्ज कर कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसी दिन यानि होली के दिन ही सिगरेट के विवाद में सूरज नामक 26 वर्षीय हिंदू युवक की हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में सादिक नामक आरोपी को गिरफ्तार कर कार्रवाई की। और अब दिल्ली से सटे गाजियाबाद में बकरीद के दिन एक 16 वर्षीय छात्र सूर्या की उसके ही परिचित अशद द्वारा चाकू गोदकर हत्या कर दी गई है। यकीनन ये वारदातें अराजक व कम्युनल अपराधियों के बढ़ते हौसले का सबूत है। एक न्यूज रिपोर्ट में मृतक की मौसी सुनीता ने कहा, मैं सबसे पहले अस्पताल गई थी। मैंने उन्हें वहां देखा। वे यह साबित करना चाहते थे कि पहले बकरे की कुर्बानी दी और अब वे इंसान की कुर्बानी देंगे। बकरीद के दिन मेरे बच्चे को धोखे से घर से बुलाया गया। फिर उससे पूछा गया कि बकरा कैसे काटा जाता है। हिंदू बच्चों को ऐसी बातों के बारे में क्या पता? हमारे बच्चों ने कभी खून-खराबा नहीं देखा। वे क्या कहते? यही कहते कि उन्होंने कभी नहीं देखा। फिर उसके पेट में चाकू घोंप दिया गया और उसकी जिंदगी वहीं खत्म हो गई। सवाल यह है कि इस तरह की दरिंदगी और बर्बरता की सोच को कौन उकसा रहा है? बकरीद से दो दिन पहले ही गाजियाबाद से सटे हापुड़ जनपद के पिलखुवा में एक शनिदेव प्रतिमा को एक समुदाय विशेष के एक जेहादी ने तोड़ दिया बाद में सीसीटीवी कैमरे के जरिए मिले सबूत से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। इन दिनों सोशल मीडिया पर भी मनमानी घृणा और विद्वेष की बातें बहुलता से वायरल हो रहीं हैं यह एक स्वस्थ समाज की संरचना को तोड़ रहा है और परस्पर जहरीली सोच तैयार कर रहा है सरकार को गंभीरता से सख्त कदम उठाने चाहिए और इस जहर की फसल को बीजनाश करनी चाहिए यूपी की धरती पर आतंक और नफरत की फसल तैयार करने का कोई मौका नहीं मिलेगा । (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं पिछले 38 वर्ष से लेखन और पत्रकारिता से जुड़े हैं) (यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है) .../ 3 जून /2026