राज्य
01-Jun-2026
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- डेढ़ साल में 791 करोड़ की धोखाधड़ी; रायपुर में भी बढ़े मामले रायपुर(ईएमएस)। छत्तीसगढ़ में साइबर अपराधियों के तौर-तरीके तेजी से बदल रहे हैं। अब ठग केवल ओटीपी या बैंक डिटेल हासिल कर ही लोगों को निशाना नहीं बना रहे, बल्कि सोशल मीडिया, फर्जी निवेश योजनाओं, डिजिटल अरेस्ट, बैंक अधिकारी बनकर कॉल और आधार से जुड़ी जानकारियों का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दे रहे हैं। राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेश में साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। हाल के कुछ मामलों ने साइबर ठगों की नई रणनीतियों को उजागर किया है। 31 मई को महालेखाकार कार्यालय में कार्यरत अकाउंटेंट शंकर बोस को फेसबुक पर दोस्ती और क्रिप्टोकरेंसी निवेश के नाम पर झांसा देकर करीब 16 लाख रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया। ठगों ने पहले सोशल मीडिया के माध्यम से विश्वास जीता और फिर व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर निवेश का लालच दिया। इसी तरह 28 मई को रायपुर निवासी शिव को बैंक अधिकारी बनकर फोन किया गया। संदिग्ध लेनदेन की पुष्टि कराने के बहाने उनसे बातचीत की गई और कुछ ही देर बाद उनके खाते से 73 हजार रुपये निकाल लिए गए। साइबर अपराधियों ने जनप्रतिनिधियों को भी नहीं छोड़ा। 27 मई को रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पीए बनकर फोन किया गया और 10 हजार रुपये की ठगी कर ली गई। हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर आरोपियों को ओडिशा से गिरफ्तार कर लिया। एक अन्य चर्चित मामले में पशुपालन विभाग से सेवानिवृत्त डॉक्टर सपन कुमार को तथाकथित डिजिटल अरेस्ट का शिकार बनाया गया। ठगों ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर डराया और आर्थिक नुकसान पहुंचाया। पुलिस ने जांच के बाद चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। आंकड़े बताते हैं कि समस्या कितनी गंभीर हो चुकी है। जनवरी 2024 से जून 2025 के बीच छत्तीसगढ़ में साइबर अपराध के 1,301 मामले दर्ज हुए, जिनमें पीड़ितों को 107 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। वहीं राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2023 से जून 2025 के बीच राज्य से 67,389 शिकायतें दर्ज हुईं और लगभग 791 करोड़ रुपये की ठगी की जानकारी सामने आई। साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। रायपुर पुलिस ने 101 म्यूल अकाउंट धारकों को गिरफ्तार किया, जिनके बैंक खातों का इस्तेमाल देशभर में 1.57 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के लेनदेन में किया गया था। इसके अलावा अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले एक अंतरराष्ट्रीय फर्जी कॉल सेंटर का भी खुलासा किया गया, जिसने दो वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की थी। डॉ. संजीव शुक्ला ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। उनका कहना है कि किसी भी अनजान कॉल, संदिग्ध लिंक, निवेश योजना, ऑनलाइन ऑफर या सरकारी अधिकारी बनकर आने वाले संदेशों पर बिना सत्यापन भरोसा न करें। समय पर शिकायत दर्ज कराने से कई मामलों में ठगी गई राशि को रोका भी जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी कार्रवाई के साथ-साथ जनजागरूकता ही साइबर अपराध के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार है। इसलिए किसी भी ऑनलाइन लेनदेन या निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल करना और अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचना बेहद जरूरी है। सत्यप्रकाश(ईएमएस)01 जून 2026