राज्य
01-Jun-2026
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मुंबई, (ईएमएस)। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) द्वारा एक प्रशिक्षु कर्मचारी को जाति सत्यापन प्रमाणपत्र जमा न करने के आधार पर सेवा से हटाने की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने बीएआरसी को निर्देश दिया है कि मामले की अगली सुनवाई तक संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए। जानकारी के अनुसार अमित कुमार नामक प्रशिक्षु कर्मचारी पिछले 18 महीनों से भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) में कार्यरत हैं। बीएआरसी प्रशासन ने 22 मई को उन्हें एक नोटिस जारी कर कहा था कि यदि सात दिनों के भीतर संशोधित जाति सत्यापन प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया, तो उनकी सेवाएं तत्काल समाप्त कर दी जाएंगी। नोटिस में आरोप लगाया गया था कि कर्मचारी ने आवश्यक जाति प्रमाणपत्र जमा नहीं किया है, जिसके कारण उनकी नियुक्ति से संबंधित शर्तों का पालन नहीं हुआ। बीएआरसी की इस कार्रवाई को गलत और अवैध बताते हुए अमित कुमार ने अधिवक्ता प्रियांशु मिश्रा के माध्यम से बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में दावा किया गया कि नियुक्ति के समय उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज जमा किए थे, जिनमें जाति प्रमाणपत्र भी शामिल था। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि प्रशासन का यह कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है कि उन्होंने प्रमाणपत्र जमा नहीं किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया तो उनकी मेहनत से प्राप्त नौकरी चली जाएगी, जिससे उन्हें अपूरणीय क्षति होगी। मामले की सुनवाई अवकाशकालीन पीठ के समक्ष हुई, जिसमें न्यायमूर्ति शाम चांडक और न्यायमूर्ति श्रीराम शिरसाट शामिल थे। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि सेवा समाप्ति की कार्रवाई उनके साथ अन्याय होगा और इससे उनके करियर पर गंभीर असर पड़ेगा। वहीं, बीएआरसी की ओर से अधिवक्ता डी.पी. सिंह ने अदालत को बताया कि मामले में प्रशासन से विस्तृत निर्देश प्राप्त करने के लिए कुछ समय की आवश्यकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सरकारी पक्ष की समय मांगने की अपील स्वीकार कर ली और मामले की अगली सुनवाई 19 जून को नियमित पीठ के समक्ष तय की। * अगली सुनवाई तक नहीं होगी कार्रवाई बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक बीएआरसी याचिकाकर्ता कर्मचारी को सेवा से नहीं हटाएगा और उसके खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई नहीं करेगा। अदालत के इस फैसले से प्रशिक्षु कर्मचारी को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। अब मामले की विस्तृत सुनवाई 19 जून को होगी, जहां अदालत यह तय करेगी कि बीएआरसी की ओर से जारी की गई नोटिस कानूनी रूप से उचित थी या नहीं। बहरहाल यह मामला सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों में नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की जांच और सत्यापन से जुड़े नियमों को लेकर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संजय/संतोष झा- ०१ जून/२०२६/ईएमएस