02-Jun-2026
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एलजी सिन्हा बोले-जब तक बुराई को खत्म नहीं किया जाएगा, मैं चैन से नहीं बैठूंगा श्रीनगर,(ईएमएस)। जम्मू-कश्मीर के एलजी मनोज सिन्हा सोमवार को ड्रग्स और नार्कों टेरर के मकड़जाल से हो रही तबाही का उल्लेख करते हुए कहा कि मैं आज यहां एक प्रशासनिक प्रमुख के रूप में नहीं बल्कि आपके परिवार के एक सदस्य के रूप में खड़ा हूं। मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि जब तक जम्मू-कश्मीर से इस बुराई को पूरी तरह से खत्म नहीं किया जाएगा, मैं चैन से नहीं बैठूंगा। नशे पर खर्च किया गया हर रुपया आतंकी हिंसा को बढ़ावा देता है और नार्को-आतंकवादी इसी धन के सहारे जीवित रहते हैं। एलजी सिन्हा ने कहा ड्रग्स और आतंकवाद दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यह अभियान आतंकवाद की आर्थिक रीढ़ पर सीधा प्रहार कर रहा है। नशीले पदार्थों के व्यापार पर रोक लगाकर आतंकवादी नेटवर्क की जीवनरेखा को काटा जा सकता है। 51 दिन पहले शुरू किया गया नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। इसमें परिवारों, युवाओं, शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक नेताओं, महिला समूहों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समाज की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। मैं आपके संघर्ष और एक सुरक्षित, संरक्षित तथा नशा-मुक्त जम्मू-कश्मीर के आपके सपने का समर्थन करने के लिए आपके परिवार के एक सदस्य के रूप में आपके सामने खड़ा हूं। यह अभियान अब केवल सरकारी विभागों या कानून-प्रवर्तन एजेंसियों तक सीमित नहीं है। यह अभियान जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के सहयोग से एक ऐसा आंदोलन बन चुका है, जिसने हर गली, हर परिवार और हर दिल को एक ही उद्देश्य से जोड़ दिया है, अपने गांवों और शहरों को नशे से मुक्त बनाना है। इस अभियान की पहल कभी परिवर्तन की एक छोटी सी चिंगारी थी, वह आज एक बड़े सामाजिक आंदोलन में बदल गई है। यदि यही एकजुटता बनी रही तो जम्मू-कश्मीर का भविष्य बदलेगा। मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि आशा, साहस और दृढ़ संकल्प की चिंगारी पूरे जम्मू-कश्मीर में प्रज्जवलित हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर ने दशकों तक आतंकवाद और हिंसा का दर्द झेला है, वहीं नशे की लत भी एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है। जम्मू-कश्मीर ने कई सालों तक आतंकवाद के अकल्पनीय हमले झेले हैं। हमने यह भी देखा कि किस प्रकार नशा धीरे-धीरे हमारे युवाओं को अपने जाल में फंसाकर समाज को कमजोर कर रहा था। उन्होंने याद दिलाया कि पीएम मोदी द्वारा 2020 में शुरू किए गए नशा मुक्त भारत अभियान के बाद 2021 से जम्मू-कश्मीर में नशा-विरोधी प्रयासों को और गति दी गई। एलजी सिन्हा ने नशे का शिकार हुए युवाओं को अपराधी नहीं, बल्कि पीड़ित बताते हुए कहा कि नशे के आदी युवाओं को सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है। उन्हें अपराधी नहीं माना जाना चाहिए। वे वास्तविक पीड़ित हैं और उनके साथ सम्मान, संवेदना और देखभाल का व्यवहार होना चाहिए। प्रत्येक जिले में आधुनिक नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र स्थापित करने की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि पुनर्वास केंद्रों का विस्तार किया जाना चाहिए और हर जिले में जल्द से जल्द सर्वोत्तम सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए। विशेषज्ञों से परामर्श के बाद पुनर्वास नीति तैयार की गई है, ताकि नशे से उबर रहे लोगों को उपचार, भावनात्मक सहयोग और समाज में सम्मानजनक पुनर्स्थापन मिल सके। यह लड़ाई लंबी है और 100 दिनों में पूरी तरह नशामुक्त समाज बनाना संभव नहीं, लेकिन जनजागरूकता और सामूहिक संकल्प ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। सिराज/ईएमएस 02जून26