लेख
02-Jun-2026
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इन दिनों देश में पेपर लीक का मामला बड़ा चर्चित है। युवा वर्ग पेपर लीक होने से सबसे ज्यादा प्रभावित है। इनकी संख्या करोड़ों में है। इसका एहसास ना तो सत्ता पक्ष को हो रहा है, ना ही विपक्ष को हो रहा है, सत्ता पक्ष सत्ता में बने रहने के लिए चहेतो को उपकृत करने, सत्ता के जरिए कमाई और अपनी ही विचारधारा के लोगों को चयनित करने के लिए इस तरह की परीक्षाओं का आयोजन करता है। परीक्षाओं के नाम पर गड़बड़ी कराके सत्ता पक्ष अपना लक्ष्य पूर्ण करता है। जिस तरह से अब परीक्षा पेपर लीक होने और परीक्षाओं में गड़बड़ी होने के मामले एक-एक करके खुलकर सामने आ रहे हैं। उसके बाद से सत्ता पक्ष की मुसीबत बढ़ाना शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष हमेशा दूसरों के ऊपर आरोप डालकर मामले को ठंडा करने में लगा रहता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला है। जो कई दशकों के बाद भी जिन लोगों ने गड़बड़ी की थी। जिनकी लापरवाही और मार्गदर्शन में व्यापम फर्जी वाड़ा हुआ था। उनके ऊपर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। हां जिन छात्रों ने पैसे देकर पीछे के रास्ते से परीक्षा पास करके अपना कैरियर बनाना चाहा था। वह दोनों दीन से चले गए, पैसा भी गया और जेल अलग से जाना पड़ा। 10 साल से ज्यादा समय हो गया है व्यापम घोटाले के आरोपी छात्र-छात्रा आज भी कोर्ट कचहरी की लड़ाई लड़ रहे हैं। मां-बाप का घर मकान बिक गया है। जो जिम्मेदार थे, वह आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। व्यापम घोटाले के आरोपी और उनके चेला-चपाटी नेशनल टेस्ट एजेंसी में मौज कर रहे हैं। जिन लोगों के पास व्यवस्था है, वही गड़बड़ी करा रहे हैं? उन्हीं के निर्देशन में जांच एजेंसियां काम करती हैं। ऐसी स्थिति में समस्या का समाधान कैसे होगा। यह आसानी से समझा जा सकता है। वर्तमान परीक्षा व्यवस्था में लगभग 30 करोड़ युवाओं का भविष्य जुड़ा हुआ है। अब तो सीबीएसई की परीक्षा परिणाम भी भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के भैंट चढ़ गया है। पहले परीक्षा फीस के नाम पर वसूली करो, फिर रिवैल्युएशन के नाम पर कमाई करो। यह कमाई उन्हीं लोगों को होती है, जिन्हें सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। ऐसी स्थिति में अब युवा वर्ग नाराजी के साथ सड़कों पर आने के लिए विवश है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल के परिणाम में जो गड़बड़ी हुई है। जांच एजेंसी उसमें कुछ नहीं कर पाई। मंत्री जी कुछ नहीं कर पाए, बड़े-बड़े अधिकारी हाथ-पै-हाथ धर के बैठे हुए हैं। यह लड़ाई खुद 12वीं के वह बच्चे जिसने परीक्षा दी थी। उसके परिणाम में गड़बड़ी हुई, वह खुद जांच कर रहा है। खुद लड़ाई के मैदान में अभिमन्यु की तरह खड़ा हो गया है। सरकार घबरा रही है, विपक्ष छात्रों के पीछे खड़ा है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिस तरह से 12वीं की बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन मैं गड़बड़ी हुई है। छात्रों की शिकायत पर पुनर्मूल्यांकन के कार्य में जो गड़बड़ी हो रही है। जब उसका मामला उठाया। तब सरकार को लगा कि मामला गलत दिशा में जा रहा है। ऐसी स्थिति में सरकार भी चैतन्य अवस्था में आई है। सरकार कार्यवाही करे, तो किस पर करे। यह सरकार के लिए सबसे बड़ी परेशानी का विषय बन गया है। शिक्षा मंत्री पर कार्यवाही नहीं कर सकते हैं, वह वही निर्णय ले रहे थे, जो उनसे कहा जा रहा था। शिक्षा मंत्री के कहने पर सारे अधिकारी वही निर्णय ले रहे थे, जो शिक्षा मंत्री जी से उन्हें मिल रहे थे। अब बलि का बकरा ढूंढ रहे हैं, जो सबसे कमजोर होगा, उसके नाम पर ठीकरा फोड़ दिया जाएगा। पिछले 12 सालों में सरकार बड़े-बड़े गड़बड़ी के मामलों में चुप्पी साधकर, मामलों को लाल बस्तों में हमेशा के लिए बंद कर देती थी। इस बार यह मामला फंस गया है। 100 से अधिक परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं। नीट परीक्षा में हर साल अरबों रुपया का वारा न्यारा होता है। परीक्षा फीस के नाम पर करोड़ों रुपए की कमाई बेरोजगार युवकों और छात्रों से की जाती है। सरकारी नौकरी और अन्य परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्तियां होती हैं। उनमें भी लेनदेन का खेल बड़े सुनियोजित तरीके से संचालित हो रहा है। अब यह सारे मामले एक-एक करके खुलकर सामने आ रहे हैं। इसको दबाके रख पाना सरकार के लिए संभव नहीं रहा। पानी सिर के ऊपर पहुंच रहा है, ऐसी स्थिति में अब युवा वर्ग अपनी लड़ाई खुद लड़ने के लिए सड़कों पर आने के लिए विवश हो गया है। उसे ना तो सत्ता पक्ष पर विश्वास है, ना विपक्ष पर विश्वास है। ना ही जांच एजेंसियों और न्यायपालिका पर विश्वास रह गया है। देश में पहली बार ऐसी स्थिति निर्मित हो रही है। जिसमें करोड़ों युवा अब आर पार की लड़ाई लड़ने के लिए मैदान में है। महाभारत का युद्ध हुआ था। इसको टालने के लिए भगवान कृष्ण ने कौरवों को सुझाव दिया था, वह पांच गांव पांडवों को दे दें। युद्ध को टाल दें। भगवान कृष्ण पांच गांव पांडवों को नहीं दिलवा पाए। महाभारत का युद्ध हुआ, जिसमें भारी विनाश हुआ। ना पांडवों के हाथ कुछ लगा, ना कौरवों को कुछ मिला। जब समय खराब होता है, तब उसी तरह की मति हो जाती है। इसलिए कहा जाता है, समय बलवान होता है। कर्म का फल समय आने पर सबको भोगना पड़ता है। नीट, प्रवेश चयन परीक्षा और बोर्ड परीक्षा में जो गड़बड़ी हुई हैं। उसके लिए शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ले लिया जाता तो शायद यह मामला ठंडा पड़ सकता था। जांच के नाम पर छोटी-छोटी मछलियों को निशाने पर लिया जा रहा है। बड़ी मछली और मगरमच्छ मस्त है, उन्हें पता है, उनका कुछ नहीं होना है। इसलिए अब छात्रों-बेरोजगार युवाओं में जो जलजला देखने को मिल रहा है। उसको देखते हुए यह कहा जा सकता है। समस्या का समाधान आसान नहीं है। जब भी इसका समाधान होगा, उसकी भारी कीमत देश को चुकानी होगी। ईएमएस / 02 जून 26