राष्ट्रीय
02-Jun-2026
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-43 टन मेडिकल सहायता की दूसरी खेप भेजी, जयशंकर ने साझा कीं तस्वीरें नई दिल्ली,(ईएमएस)। इबोला वायरस के बढ़ते प्रकोप से जूझ रहे अफ्रीकी देशों की मदद के लिए भारत ने एक बार फिर मानवीय सहयोग का हाथ बढ़ाया है। भारत सरकार ने अफ्रीका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) को 43 टन मेडिकल सहायता की दूसरी खेप भेजी है। इस सहायता में स्वास्थ्यकर्मियों के लिए सुरक्षा उपकरण, जांच और निगरानी से जुड़े उपकरण, दवाइयां तथा आवश्यक चिकित्सा सामग्री शामिल है। भारत की इस पहल को अफ्रीकी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सराहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर सहायता सामग्री की तस्वीरें साझा करते हुए जानकारी दी कि यह दूसरी खेप अफ्रीका में सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को मजबूत करने और इबोला जैसी गंभीर स्वास्थ्य आपदाओं से निपटने की क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सहयोग अफ्रीकी देशों के स्वास्थ्य तंत्र को और अधिक सक्षम बनाएगा। इससे पहले भी भारत ने इबोला प्रभावित क्षेत्रों के लिए आपातकालीन चिकित्सा सहायता भेजी थी। हाल ही में भेजी गई पहली खेप के बाद यह दूसरी बड़ी मदद है, जिसे विशेष रूप से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। बताया गया है कि यह सामग्री युगांडा स्थित अफ्रीका सीडीसी के पूर्वी क्षेत्रीय समन्वय केंद्र के माध्यम से भेजी गई, जहां से इसे इबोला प्रभावित क्षेत्रों, विशेषकर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो के पूर्वी हिस्सों तक पहुंचाया जाएगा। अफ्रीका सीडीसी ने भारत सरकार और भारतीय जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहायता इबोला प्रकोप को नियंत्रित करने तथा प्रभावित समुदायों को राहत पहुंचाने के प्रयासों को मजबूती देगी। संस्था ने कहा कि भारत का सहयोग अफ्रीका के साथ उसकी प्रतिबद्धता और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाता है। यहां बताते चलें कि अफ्रीका सीडीसी, अफ्रीका यूनियन की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी है, जो महाद्वीप में बीमारी की रोकथाम और आपातकालीन स्वास्थ्य प्रतिक्रियाओं का समन्वय करती है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अफ्रीकी स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सा एवं लॉजिस्टिक सहायता भेजने के लिए भी तैयार है। इबोला संकट के बीच भारत की यह पहल वैश्विक मानवीय सहयोग और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना का एक और उदाहरण मानी जा रही है। हिदायत/ईएमएस 02जून26