अंतर्राष्ट्रीय
03-Jun-2026
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वाशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिका के आयोवा राज्य का मस्कटाइन शहर मंगलवार की सुबह अंधाधुंध गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा। एक ही परिवार के 7 लोगों की बेरहमी से गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिसके बाद हमलावर ने खुद को भी उड़ा लिया। पुलिस के मुताबिक, यह खूनी खेल एक घरेलू विवाद का नतीजा था, जिसे 52 वर्षीय रायन विलिस मैकफारलैंड नामक शख्स ने अंजाम दिया। पार्क एवेन्यू के एक घर से शुरू हुआ मौत का यह सिलसिला मिल स्ट्रीट और ग्रैंडव्यू एवेन्यू तक जा पहुंचा। पुलिस ने जब संदिग्ध को घेरा, तो उसने खुद को गोली मार ली। पुलिस भले ही इसे घरेलू मामला बताकर पल्ला झाड़ ले कि अब समुदाय को कोई खतरा नहीं है, लेकिन इस भयावह घटना ने एक बार फिर दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश पर सबसे बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है आखिर अमेरिका में बार-बार मास शूटिंग क्यों हो रही है? हथियारों की सनक या कानून की लाचारी? आयोवा का यह नरसंहार कोई इकलौती घटना नहीं है। यह अमेरिकी समाज में गहरे धंस चुके गन कल्चर की उस सड़ी हुई हकीकत को बयां करता है, जहां मामूली विवादों का निपटारा भी बंदूकों से किया जाता है। आखिर ऐसा क्यों है कि अमेरिका में हर नागरिक के पास घातक हथियार रखने का अधिकार तो है, लेकिन उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है? हर बड़ी घटना के बाद वहां गन कंट्रोल (हथियार नियंत्रण) पर बहस तो छिड़ती है, लेकिन नतीजा सिफर रहता है। राजनीतिक नफा-नुकसान और हथियार लॉबी के दबाव के आगे अमेरिकी प्रशासन बेबस नजर आता है। खौफनाक आंकड़े: जब मौत ही बन जाए आदत गन वायलेंस अर्काइव के आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में गोलीबारी अब कोई अपवाद नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की आदत बन चुकी है। साल 2025 में देश ने लगभग 425 मास शूटिंग देखीं, जिनमें 420 से ज्यादा बेकसूर लोगों की जान चली गई। वहीं, साल 2026 के शुरुआती पांच महीनों में ही यह आंकड़ा 121 के पार जा चुका है। चाहे जुलाई 2025 में शिकागो के नाइटक्लब के बाहर हुई फायरिंग हो, अक्टूबर 2025 में मिसिसिप्पी के हाईस्कूल में मासूमों का कत्लेआम हो, या मार्च 2026 में लुइसियाना की वो दिल दहला देने वाली घटना—जहां 8 बच्चों समेत 10 लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया—हर बार अमेरिका सिर्फ शोक मनाता दिखता है। स्कूल, मॉल्स, नाइटक्लब और अब तो लोगों के घर भी सुरक्षित नहीं बचे हैं। आयोवा की इस ताजा घटना ने वैश्विक मंच पर अमेरिका के इस सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है कि क्या अमेरिकी नागरिकों की जान इतनी सस्ती हो चुकी है? वीरेंद्र/ईएमएस 03 जून 2026